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“नील जल में या किसी कीगौर झिलमिल देह,जैसे हिल रही हो।”उपर्युक्त विम्ब द्वारा कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य का चित्रण किया है। क्या इस अंश में प्रयुक्त उपमान आपको उपयुक्त प्रतीत होते हैं?

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इस शब्द-चित्र द्वारा कवि शमशेर बहादुर सिंह ने प्रात:कालीन आकाश के दृश्य को साकार करना चाहा है। सूर्योदय से पहले आकाश में कुछ समय के लिए पीला प्रकाश उदित होता है। नीले आकाश में झिलमिलाता यह पीला प्रकाश कवि को उपर्युक्त विम्ब की रचना को प्रेरित करता है। कवि द्वारा चुने गए उपमान प्राकृतिक दृश्य के अनुरूप ही है। नीला आकाश, नीला जल है और पीला प्रकाश जल में झिलमिलाती किसी गोरी रमणी की देह है। निरंतर होते दृश्य परिवर्तन को कवि ने हिलती’ शब्द द्वारा व्यक्त किया है। अतः इस विम्ब में प्रयुक्त उपमान दृश्य के अनुरूप और उसमें पूर्णता तथा प्रभाव उत्पन्न करने वाले हैं।



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