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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए − फूल के ऊपर जो रेणु उसका श्रृंगार बनती है, वही धूल शिशु के मुँह पर उसकी सहज पार्थिवता को निखार देती है। nimnalikhit kaa aashay spaṣṭ keejie − fool ke oopar jo reṇau usakaa shrringaar banatee hai, vahee dhool shishu ke munh par usakee sahaj paarthivataa ko nikhaar detee hai. रामविलास शर्मा

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प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारे पाठ्यपुस्तक 'स्पर्श' से ली गयी हैं जिसके लेखक रामविलास शर्मा जी हैं। इस कथन का आशय यह है कि जिस तरह फूल के ऊपर धूल आ जाने से वह उसकी सज्जों सज्जा को बढाती है उसी प्रकार शिशु के मुख पर धूल उसकी सुंदरता को ओर भी निखार देती है।



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