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निम्नलिखित लोकोक्तियाँ अर्थ लिखिए :1. अपना हाथ जगन्नाथ2. आप भला तो जग भला3. घर का भेदी लंका ढाए 4. अधजल गगरी छलकत जाये 5. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता 6. अब पछताये होत क्या चिड़िया चुग गई खेर 7. अशर्फी की लूट, कोयले पर छाप 8. आम का आम, गुठली का दाम 9. आये थे हरिभजन को, ओटने लगे कपास 10. आँख का अंधा, नाम नयनसुख 11. उलटे चोर कोतवाल को डाँटे 12. ऊँट के मुँह में जीरा 13. ऊँची दुकान, फीके पकवान 14. ऊँट किस करवट बैठता है 15. एक पंथ दो काज 16. एक म्यान में दो तलवार 17.  एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा 18.  अंधों में काना राजा19.  काला अक्षर भैंस बराबर 20.  का वर्षा जब कृषि सुखाने 

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1.   अपना हाथ जगन्नाथ – स्वयं किया कार्य सब से अच्छा होता है।

2.   आप भला तो जग भला – अच्छे को सभी अच्छे लगते हैं।

3.   घर का भेदी लंका ढाए – आपस की फूट से : सर्व नाश होता है।

4.   अधजल गगरी छलकत जाये – थोड़ा हासिल सोने पर घमंड होना।

5.   अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता – कोई बड़ा कार्य एक आदमी के वश की बात नहीं।

6.   अब पछताये होत क्या चिड़िया चुग गई खेर – काम का समय बीत जाने पर पछताने से क्या लाभ?

7.   अशर्फी की लूट, कोयले पर छाप – बहुमूल्य वस्तुएँ तो नष्ट होने को छोड़ दी गयीं, पर साधारण वस्तुओं की रक्षा का प्रयत्न ।

8.   आम का आम, गुठली का दाम – दुहरा फायदा उठाना।

9.   आये थे हरिभजन को, ओटने लगे कपास – जिस काम को करने आये, वह किया नहीं और दूसरे बुरे या तुच्छ काम में उलझ जाना।

10.  आँख का अंधा, नाम नयनसुख – गुण के विपरीत नाम।

11.  उलटे चोर कोतवाल को डाँटे – दोषी निर्दोष पर कलंक लगाये।

12.  ऊँट के मुँह में जीरा – जरूरत से बहुत कम।

13.  ऊँची दुकान, फीके पकवान – केवल बाहरी चमक-दमक, भीतर खोखलापन।

14.  ऊँट किस करवट बैठता है – लाभ किस पक्ष को होता है।

15.  एक पंथ दो काज – एक साथ दो लाभ।

16.  एक म्यान में दो तलवार – दो प्रतिकूल स्वभाव वाले व्यक्तियों का एक साथ निवास।

17.  एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा – बुरे के साथ बुरे का मिल जाना।

18.  अंधों में काना राजा – अज्ञकनियों के बीच थोड़ी समझ के व्यक्ति का आदर होना।

19.  काला अक्षर भैंस बराबर – निरक्षर भट्टाचार्य ।

20.  का वर्षा जब कृषि सुखाने – अवसर बीत जाने पर प्रयत्न करना।



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