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निम्नलिखित लोकोक्तियाँ अर्थ लिखिए :1. खग जाने खग ही की भाषा 2. खोदा पहाड़, निकली चुहिया 3. गरजे सो, बरसे नहीं 4. गाँव का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध 5. घर के भेदी लंकादाह 6. घर की मुर्गी दाल बराबर 7. चोर की दाढ़ी में तिनका 8. छोटा मुँह, बड़ी बात9. छबूंदर के सिर पर चमेली का तेल 10. छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ सुबहानल्लाह 11. जस दूलह तस बनी बारात 12. जाके पाँव न फटे बिवाई सो क्या जाने पीर पराई 13. जिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ 14. जैसा देश, वसा भेष15. जिसकी लाठी उसकी भैंस16. जल में रहे, मगर से बैर 17. जैसी करनी, वैसी भरनी 18. जैसी बहे बयार, पीठ तब तैयी कीजै 19. जिस पत्तल में खाना, उसी पत्तल में छेद करना 20. झोपड़ी में रहना और महल का सपना देखना |
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Answer» 1. खग जाने खग ही की भाषा – अपने-जैसे लोगों के विषय में पूरी जानकारी होना। 2. खोदा पहाड़, निकली चुहिया – अत्यधिक परिश्रम के पश्चात् तुच्छ फल की प्राप्ति । 3. गरजे सो, बरसे नहीं – डींग हाँकनेवाले से ज्यादा काम नहीं होता। 4. गाँव का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध – घर का व्यक्ति चाहे कितना भी योग्य हो, घर में आदर नहीं पाता; किन्तु बाहर के साधारण व्यक्ति का भी सम्मान होता है। 5. घर के भेदी लंकादाह – आपसी वैमनस्य से बड़ी हानि होती है। 6. घर की मुर्गी दाल बराबर – परिचित चीज का विशेष मूल्य नहीं होता। 7. चोर की दाढ़ी में तिनका – अपराधी की मुद्रा से अपराध का पता चल जाता है। 8. छोटा मुँह, बड़ी बात – अपनी योग्यता से अधिक बातें करना। 9. छबूंदर के सिर पर चमेली का तेल – अयोग्य के लिए अच्छी वस्तु का प्रयोग। 10. छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ सुबहानल्लाह – छोटे से भी अधिक बडे में दोष होना। 11. जस दूलह तस बनी बारात – जैसे खुद, वैसे साथी। 12. जाके पाँव न फटे बिवाई सो क्या जाने पीर पराई – वैयक्तिक अनुभव न रहने पर दूसरे के कष्ट का अनुभव नहीं होता। 13. जिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ – निरंतर परिश्रम से सफलता मिलती है। 14. जैसा देश, वसा भेष- परिस्थिति के अनुसार काम करना चाहिए। 15. जिसकी लाठी उसकी भैंस- बलवान सब कुछ कर लेता है। 16. जल में रहे, मगर से बैर – जिसके मातहत हैं, उसी का विरोध करना। 17. जैसी करनी, वैसी भरनी – जैसा कार्य करेंगे, वैसा फल पायेंगे। 18. जैसी बहे बयार, पीठ तब तैयी कीजै – समय देखकर काम करना चाहिए। 19. जिस पत्तल में खाना, उसी पत्तल में छेद करना – उपकार न मानना। 20. झोपड़ी में रहना और महल का सपना देखना – हैसियत से परे सोचना। |
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