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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करें:होते कहीं वही हम लोग,कौन भोगता फिर ये भोग?उन्हीं अन्नदाताओं के सुख आज दुःख हरते हैं।हम राज्य लिए मरते हैं। |
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Answer» उर्मिला कहती है कि यदि कहीं हम भी किसान होते तो फिर राज्य की गृह-कलह के कारण उत्पन्न कष्टों को कौन सहन करता? यदि हम भी किसान होते तो राज्य की उलझनों को सहज करने वाला भी तो कोई होना चाहिए। उन्हीं अन्नदाता किसानों के सुखों को देखकर ही आज हमारे दुःख दूर हो रहे हैं फिर भी हम राज्य के लिए लड़ते-मरते रहते हैं। |
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