1.

निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करें:करके मीन मेख सब ओर,किया करें बुध वाद कठोर,शाखामयी बुद्धि तजकर वे मूल धर्म धरते हैं।हम राज्य लिए मरते हैं।

Answer»

उर्मिला कहती है कि विद्वान् लोग हर बात में दोष निकाल कर व्यर्थ में बहस करते रहते हैं, चाहे उस से कुछ प्राप्त हो या न हो परंतु किसान इन व्यर्थ की बातों को त्यागकर सहज धर्म को अपनाते हैं। वे विद्वानों के चक्कर में न पड़कर धर्म के वास्तविक स्वरूप को सहज रूप से अपनाते हैं जबकि हम राज्य के लिए आपस में ही लड़ते-मरते रहते हैं।



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