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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करें:करके मीन मेख सब ओर,किया करें बुध वाद कठोर,शाखामयी बुद्धि तजकर वे मूल धर्म धरते हैं।हम राज्य लिए मरते हैं। |
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Answer» उर्मिला कहती है कि विद्वान् लोग हर बात में दोष निकाल कर व्यर्थ में बहस करते रहते हैं, चाहे उस से कुछ प्राप्त हो या न हो परंतु किसान इन व्यर्थ की बातों को त्यागकर सहज धर्म को अपनाते हैं। वे विद्वानों के चक्कर में न पड़कर धर्म के वास्तविक स्वरूप को सहज रूप से अपनाते हैं जबकि हम राज्य के लिए आपस में ही लड़ते-मरते रहते हैं। |
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