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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करेंएक दिन तने ने भी कहा था,जड़?जड़ तो जड़ ही हैजीवन से सदा डरी रही है,और यही है उसका सारा इतिहासकि ज़मीन से मुँह गड़ाए पड़ी रही है;

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कवि लिखता है कि एक दिन तने ने जड़ के संबंध में कहा कि जड़ तो बिलकुल जड़ अर्थात् निर्जीव है। वह सदा जीवन से भयभीत रहती है। उसका सारा इतिहास यही है कि वह सदा ज़मीन में ही मुँह गड़ा कर पड़ी रहती है, वह संसार से मुँह छिपा कर जमीन के अंदर छिपी रहती है, किंतु तना स्वयं को जमीन से ऊपर उठा कर बढ़ता हुआ बताता है, वह मज़बूत बना हुआ है इसलिए तना कहलाता है, वह तना हुआ अर्थात् अकड़ा हुआ, घमंडी है।



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