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निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए(क) मुगलकालीन स्थापत्य कला |
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Answer» (क) मुगलकालीन स्थापत्य कला – मुगल सम्राट वास्तुकला या स्थापत्य कला अथवा भवन निर्माण कला के महान् पोषक एवं संरक्षक थे। मुगल कला अनेक प्रभावों का सम्मिश्रण थी तथा अपने पूर्वकाल की कला की अपेक्षा अधिक विशिष्ट और अलंकरणयुक्त थी। इसकी रमणीयता और अलंकरण; सल्तनतकालीन काल की सादगी और धीमकायता के विपरित था। मुगलकाल में निर्मित स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषताएँ विराट गोल गुम्बद, पतले स्तम्भ तथा विशाल खुले हुए प्रदेश द्वार हैं। 1. बाबर तथा हुमायूँ – मुगल साम्राज्य का संस्थापक बाबर था, जिसे भारत की भवन निर्माण कला पसन्द नहीं आई। उसने कुस्तुनतुनियाँ से कलाकारों को बुलवाया और उनके द्वारा उसने कुछ इमारतों का निर्माण करवाया। उसने लगभग 1500 कारीगरों से प्रतिदिन कार्य करवाया तथा आगरा, ग्वालियर, बयाना और धौलपुर में कुछ भवनों का निर्माण करवाया परन्तु उसके काल के भवन अधिकाशंत: नष्ट हो चुके हैं, केवल पानीपत में काबुली बाग की मस्जिद तथा रुहेलखण्ड में सम्भल की जामा मस्जिद शेष हैं जो उसके कला प्रेम की द्योतक हैं। बाबर के उत्तराधिकारी हुमायूँ को इतना समय नहीं मिला कि वह भवनों का निर्माण करवा सकता, परन्तु हिसार जिले के फतेहाबाद में उसके द्वारा निर्मित मस्जिद आज भी विद्यमान है जिसमें ईरानी कला का बाहुल्य है 2. शेरशाह सूरी – हुमायूं के भारत से चले जाने के बाद शेरशाह सूरी ने अपना साम्राज्य स्थापित किया। वह भी कला का महान पोषक था तथा अनेक दुर्गों का निर्माण करवाया जो शिल्पकला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। दिल्ली में आज भी उसके द्वारा निर्मित दुर्ग के कुछ अवशेष प्राप्त होते हैं, जो उसकी आकस्मिक मृत्यु के कारण अपूर्ण रह गया था। शेरशाह के काल की सुन्दरतम कृति बिहार में सासाराम में उसका मकबरा है जो झील के बीचों-बीच निर्मित किया गया है। यह मकबरा भव्यता, सुन्दरता तथा सुडौलपन में अद्वितीय है। इसमें देशी तथा विदेशी कलाओं का सुन्दर सम्मिश्रण है। 3. अकबर – मुगल सम्राटों में अकबर प्रथम सम्राट था जिसके काल की अनेक कला-कृतियाँ आज भी उपलब्ध हैं। अकबर ने देशी तथा विदेशी दोनों कलाओं के सुन्दर तत्त्वों का समावेश अपनी कला में किया तथा कला को व्यापक संरक्षण प्रदान किया। यद्यपि अकबर की कला में भारतीय तथा ईरानी तत्त्व विद्यमान हैं परन्तु उसमें भारतीय तत्त्वों का बाहुल्य है। बौद्ध तथा जैन शैली को भी सम्राट ने उदारतापूर्वक अपनाया है। उसके काल के अधिकांश भवन आगरा तथा फतेहपुर सीकरी में निर्मित हुए। आगरा का प्रसिद्ध दुर्ग अकबर ने निर्मित करवाया जिसमें दीवान-ए-आम, जहाँगीरी महल आदि प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। फतेहपुर सीकरी की समस्त इमारतें सुदृढ़ लाल पत्थर द्वारा निर्मित हैं जिसमें दीवान-ए-आम, जोधाबाई का महल तथा अन्य दो रानियों के महल, संगमरमर की जामा मस्जिद, दक्षिण विजय को चिरस्मरणीय बनाने के लिए निर्मित विशाल बुलन्द दरवाजा, बौद्ध विहारों के आधार पर निर्मित पंचमहल तथा विशुद्ध संगमरमर की शेख सलीम चिश्ती की दरगाह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त बीरबल का महल तथा बादशाह की ख्वाबगाह भी दर्शनीय इमारतें हैं। 4. जहाँगीर – अकबर के उत्तराधिकारी जहाँगीर को भवन निर्माण कला से उतना प्रेम नहीं था जितना चित्रकला से; अतः उसके काल में अधिक भवनों का निर्माण नहीं हुआ। परन्तु एक तो उसने अपने पिता द्वारा आरम्भ किए गए सिकन्दरा के मकबरे को पूर्ण करवाया जिसके दर्शनार्थ वह बहुधा पैदल जाया करता था। और जहाँगीर के काल की दूसरी कलाकृति आगरा में नूरजहाँ के पिता एतमादुद्दौला का मकबरा है जो शुद्ध संगमरमर का बना हुआ है और उसमें विभिन्न रंगों के बहुमूल्य पत्थर जड़े हुए हैं। जहाँगीर का मकबरा लाहौर में है, जिसे उसकी मृत्यु के पश्चात नूरजहाँ ने बनवाया था। 5. शाहजहाँ – शाहजहाँ भवन निर्माण कला का प्रेमी सम्राट था तथा उसके काल में मुगल युग की सर्वाधिक सुन्दर कलाकृतियाँ निर्मित हुईं। शाहजहाँ के भवन दृढ़ता तथा मौलिकता में अकबर के भवनों से निम्न कोटि के हैं परन्तु सौन्दर्य, रमणीयता, अलंकरण तथा सरलता से बेजोड़ हैं। शाहजहाँ ने बहुमूल्य पत्थरों तथा स्वर्ण का अत्यधिक प्रयोग किया है जिससे उसके भवनों की जगमगाइट एवं आकर्षण में चार चाँद लग गए हैं। शाहजहाँ ने दिल्ली में शाहजहाँनाबाद का दुर्ग निर्मित करवाया जिसके भवनों में दीवान-ए-आम जो लाल पत्थर से बना है, दीवान-ए-खास जो शुद्ध संगमरमर से बना है, रंगमहल, खासमहल आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। दीवान-ए-खास अधिक अंलकरण युक्त है जहाँ पर मयूर सिंहासन पर सम्राट बैठा करता था। उसकी छत पर सोने की नक्काशी दर्शनीय है। श्वेत संगमरमर के इस भवन पर लिखा हुआ यह शेर सत्य ही प्रतीत होता है कि यदि पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वह यहीं पर है दिल्ली में जामा मस्जिद शाहजहाँ के काल की अन्यतम कृति है, जो लाल पत्थर द्वारा निर्मित है। दिल्ली के अतिरिक्त आगरा में शाहजहाँ के काल की सर्वश्रेष्ठ इमारतें उपलब्ध होती हैं। अकबर के द्वारा निर्मित आगरा के दुर्ग में शाहजहाँ ने सफेद संगमरमर की मोती मस्जिद तथा मुसम्मन बुर्ज का निर्माण करवाया। इसी मोती मस्जिद में, बन्दी के रूप में शाहजहाँ ने अपने जीवन के अन्तिम आठ वर्ष व्यतीत किए तथा मुसम्मन बुर्ज में, ताजमहल को देखते-देखते उसने अपने प्राण त्यागे।। 6. औरंगजेब – शाहजहाँ के पश्चात औरंगजेब मुगल सम्राट बना। वह धर्मानुरागी शासक था। वह संयमित जीवन जीने का आदि था तथा शरियत के अनुसार शासन संचालित करता था। उसने रास-रंग के सभी आयोजनों पर रोक लगा दी। वह जनहित के कार्यों में रुचि रखता था। उसने जनता की मेहनत की धनराशि वास्तुशिल्प पर खर्च न कर जनता के हित में खर्च करने का आदेश दिया और सभी प्रकार की ललित कलाओं के निर्माण व आयोजन पर कड़ी रोक लगा दी गई। उसके काल में तीन मस्जिदों के अतिरिक्त अन्य किसी भवन का निर्माण नहीं हुआ। इन मस्जिदों में दिल्ली के किले में |
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