1.

निम्नलिखित प्रक्तियों की व्याख्या कीजिए।1. इस प्रकार पृथ्वी का चक्कर लगाने का क्या मतलब हो सकता है?2. हम लोग यहाँ एक मिशन के तहत आए हैं।3. आप अपने जलाशयों को साफ़ और सुरक्षित रखें ताकि आपको भी हमारी तरह जलचोर न बनना पड़ें।

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1. 

यह वाक्य “जल ही जीवन है” नामक पाठ से लिया गया है। कहानीकार है श्री प्रकाश ।

प्रो. दीपेश और प्रो. विकास दोनों एक बगीचे में बैठे बातचीत करते समय उस बगीचे में एक अंतरिक्ष यान उतरा। उन दोनों आश्चर्य चकित होकर इसे देखते इस प्रकार सोचते हैं कि यह यान यहाँ क्यों उतरा? इस प्रकार पृथ्वी का चक्कर लगाने का क्या मतलब हो सकता है?

इसका मतलब यह है कि यह यान उतरने का, पृथ्वी का चक्कर लगाने का क्या कारण हो सकता है?

2.

यह वाक्य “जल ही जीवन है” नामक कहानी पाठ से लिया गया है। कहानीकार है श्री प्रकाश |
इस वाक्य को अंतरिक्ष यान से उतरे एक मानवाकृति वाले ने प्रो. दीपेश और प्रो. विकास से कहते हैं।
प्रो. दीपेश और प्रो. विकास बगीचे में बैठकर बातें करते समय उसी बगीचे में एक अंतरिक्ष यान उतरता है। उस यान से एक मानवाकृति बाहर आई जो आकार में बड़ी थी।

प्रो. दीपेश और प्रो. विकास उसे पूछने पर वह बताता है कि वह यहाँ से (भू ग्रह से) एक कांतिवर्ष (प्रकाश वर्ष) दूरी पर के अन्य ग्रह के वासी हैं। वह यहाँ एक मिशन के तहत आए हैं।

वह मिशन था यहाँ के जलाशय से पानी अपने ग्रह को ले जाना।

3.

यह वाक्य को “जल ही जीवन है” नामक कहानी पाठ से लिया गया है। कहानीकार है श्री प्रकाश जी।

इस वाक्य को अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर आये एक मानवाकृति वाले प्रो. दीपेश और प्रो. विकास से कहते हैं।

भूमि से प्रकाशवर्ष दूरी पर के अपने ग्रह के पानी जहरीले बनने के कारण वह पृथ्वी पर उतरकर यहाँ के जल को चोरी करके ले जा रहे हैं।

इस सिलसिले में वह मानवाकृतिवाले ने प्रो. दीपेश और प्रो. विकास से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि पृथ्वी के जलाशयों को साफ़ और सुरक्षित रखें, क्योंकि हमारे जैसे आपको जल चोर न बनना पड़ें।



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