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Answer» उत्तर : समुद्र को देखकर रामन के मन में दो जिज्ञासाएं उठी कि समुद्र का रंग नीला क्यों होता है और समुद्र का रंग कोई दूसरा क्यों नहीं होता।
रामन १९२१ में समुद्री यात्रा कर रहे थे। वे जहाज के डेक पर खड़े होकर नीले सागर को घंटो देखते रहते थे। उन्हें सागर की नील - वर्णीय आभा बहुत अच्छी लगी थी। तब उनके मन में यह दो जिज्ञासाएं उत्पन्न हुई कि समुद्र का रंग नीला क्यों होता है और समुद्र का रंग कोई दूसरा क्यों नहीं होता। रामन अपने मन में उत्पन्न प्रश्न का उत्तर ढूंढने में लग गए और उन्होंने ‘रामन प्रभाव ‘ की खोज कर ली।
आशा है कि यह उत्तर आपकी मदद करेगा।।।।
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