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निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए : चित्रगुप्त की परेशानियों को रेखांकित कीजिए । |
| Answer» लेखक अस्पताल में थे और चित्रगुप्त उनके प्राण लेने आए थे । तब उनसे प्रार्थना की गई कि वे शनिवार को आएं तो उचित होगा । चित्रगुप्त ने वह प्रार्थना स्वीकार ली और शनिवार को वे आए । इस बार अस्पताल में मुंशी ने उन्हें अस्पताल का न्य नियम बताते हुए कहा कि अस्पताल में कोई भी चीज अथवा मरीज के प्राण ले जाने के लिए उन्हें बड़े बाबू के दफ्तर से एक फ़ार्म लेकर भरना पडेगा । स्वतंत्रता के पहले तक चित्रगुप्त को ऐसे किसी फ़ार्म भरने के चक्कर में नहीं फसना पड़ता था । यह फ़ार्म पाने में चित्रगुप्त को पूरा एक दिन लग गया । अब मुसीबत यह थी कि उस फ़ार्म की आठ प्रतियाँ सही-सही भरनी थी । फार्म पाने की अपेक्षा यह काम अधिक कष्टदायक था, क्योकि इसमें मरने वाले का नाम, उसका पेशा, हुलिया, बल्दियत, ऊंचाई, चौड़ाई और वजन की जानकारी ईमानदारी से दर्ज करनी थी । फार्म भरने के बाद चित्रगुप्त उसे बड़े बाबू के पास ले गए । वहाँ फिर एक मुसीबत कड़ी हो गई । बड़े बाबू ने उन्हें फ़ार्म पर किसी ऐसे संभ्रात व्यक्ति का काउंटरसाइन करवाने के लिए कहा, जो उन्हें भली -भांति जनता हो । यह सुनकर चित्रगुप्त घबरा गए और कई घंटो तक घूमते रहे, पर उन्हें फ़ार्म पर काउंटरसाइन करने वाला कोई व्यक्ति नहीं मिला । आखिरकार, उन पर दया खाकर लेखक ने ही अपना काउंटरसाइन कर दिया । इसके बाद फार्म पर बीस रुपए की रसीदी टिकट लगाने की समस्या आई सब डाकखाने बंद हो चुके थे । टिकट कहीं से मिलने की संभावना नहीं थी और चित्रगुप्त का दौर रविवार तक ही था अंत में बड़े बाबू की सलाह से उनकी समस्या हल हो गई । इस प्रकार, लेखक के प्राण लेने के लिए आए हुए चित्रगुप्त को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा । | |