1.

निर्देशन विधि के आधार पर किया गया निर्देशन का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।

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निर्देशन प्रदान करने की विधि के आधार पर निर्देशन दो प्रकार का है –

(i) वैयक्तिक निर्देशन (Individual Guidance) – सर्वोत्तम समझे जाने वाले इस निर्देशन का प्रयोग व्यक्ति विशेष की गम्भीरतम समस्याओं को हल करने में किया जाता है। इसके अन्तर्गत निर्देशक समस्यायुक्त व्यक्ति से व्यक्तिगत सम्पर्क साधता है, उसका बारीकी से अध्ययन करता है, उसकी समस्याओं को स्वयं समझने का प्रयास करता है और इसके बाद व्यक्ति को इस योग्य बनाता है। कि वह अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं ही प्रस्तुत कर सके। व्यक्ति की समस्याओं का ज्ञान प्राप्त करने हेतु मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं साक्षात्कार के प्रयोग के अतिरिक्त उसकी पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी अध्ययन किया जाता है। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर एक प्रोफाइल (Profile) तैयार की जाती है।

इस प्रकार के निर्देशन में मनोवैज्ञानिक या विशेषज्ञ एक बार में केवल एक व्यक्ति पर ध्यान दे पाता है। इस कारणवश यह निर्देशन धन और समय की दृष्टि से महँगा पड़ता है। इसके अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक/विशेषज्ञ के अभाव में इसका प्रयोग करना सम्भव नहीं है। अतः वैयक्तिक निर्देशन उसी समय प्रदान किया जाता है जबकि व्यक्ति से सम्बन्धित समस्या की प्रकृति जटिल हो गयी हो और वह सांवेगिक रूप से अत्यधिक उलझ गया हो।

(ii) सामूहिक निर्देशन (Group Guidance) – कभी-कभी एक समूह के समस्त व्यक्तियों की समस्या एक ही या एकंसमान होती है। उस दशा में व्यक्तियों के एक समूह को एक साथ निर्देशन प्रदान किया जाता है जिसे सामूहिक निर्देशन का नाम दिया जाता है। प्रसिद्ध विद्वान् ए० जे० जोन्स ने लिखा है, “सामूहिक निर्देशन वह प्रक्रिया है जो समूह में प्रत्येक व्यक्ति को इस प्रकार व्यक्तिगत सहायता प्रदान करती है जिससे वह अपनी समस्याओं को सुलझा सके तथा समायोजन स्थापित कर सके।” पाठ्य-विषयों के चुनाव से सम्बन्धित शैक्षिक निर्देशन एवं व्यावसायिक निर्देशन में यह विधि अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होती है।



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