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पद का भावार्थ लिखें:म्हारां री गिरधर गोपाल दूसरां न कूयां।दूसरां न कोवां साधां सकल लोक जूयां।भाया छांड्या बंधां छांड्या सगां सूयां।साधां संग बैठ बैठ लोक लाज खूया।भगत देख्यां राजी ह्ययां जगत देख्यां रूयां।असवां जल सींच सींच प्रेम बेल बूयां।राणा विषरो प्याला भेज्यां पीय मगन हुयां।अब तो बात फैल पड्या जाणं सब कूयां।मीरां री लगन लग्यां होना होजू हूँया। |
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Answer» भावार्थ : मेरा तो गिरधर गोपाल के अलावा और कोई दूसरा नहीं है, अर्थात् वही मेरा एकमात्र प्राणाधार (जीवन का आधार) है। हे साधु! मैंने सारा जग देख लिया है, कृष्ण के अतिरिक्त मेरा कोई दूसरा है ही नहीं। उस कृष्ण के लिए मैंने अपना भाई छोड़ दिया है; अर्थात् उसके लिए संसार के समस्त प्रिय रिश्ते-नाते छोड़ दिए हैं। मैंने साधुओं के पास बैठ-बैठ कर लोक की लाज को खो दिया है। कृष्णभक्त को देखकर मैं प्रसन्न होती हूँ और संसार की सांसारिकता को देखकर मुझे रोना आता है। मैंने अपने आँसुओं से सींच-सींच कर अपने हृदय में कृष्ण के प्रेम की बेल बो ली है और दही को मथ कर उसमें से घी निकाल लिया है तथा छाछ को छोड़ दिया है। अर्थात् सार तत्व ग्रहण कर लिया है और असार तत्व छोड़ दिया है। राणा ने मुझे कृष्ण भक्ति से विमुख करने के लिए विष का प्याला भेजा था, जिसे मैंने प्रसन्न होकर पी लिया। मीरा कहती है कि अब तो मेरी लंगन गिरधर कृष्ण से लग गई है, यह छूट नहीं सकती, चाहे जो हो। विशेष : इसमें मीरा की अनन्य भक्ति की सुन्दर अभिव्यंजना हुई है। |
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