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‘पड़ाव को ही समझे मंजिल’ का क्या आशय है ? |
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Answer» जीवन में किसी मोड़ पर जहाँ हमें कोई उपलब्धि मिल जाती है तो हम उसी को मंजिल मानकर, ठहर जाते हैं, जबकि यदि हम चलते रहें तो ऐसी अनेक उपलब्धियाँ हासिल करते रहेंगे। |
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