Saved Bookmarks
| 1. |
पढ़ता-लिखता हूँ । यही पेशा है । सो दुनिया के बारे में पोथियों के सहारे ही थोड़ा बहुत जानता हूँ, पढ़ा हूँ हिन्दुस्तान के जवानों में कोई उमंग नहीं है, इत्यादि इत्यादि । इधर देखता हूँ कि पेड़ पौधे और भी बुरे है सारी दुनिया में हल्ला हो गया कि बसन्त आ गया । पर इन कम्बख्तों को कोई खबर ही नहीं । कभी कभी सोचता हूँ कि इनके पास तक संदेश पहुँचाने का क्या कोई साधन नहीं हो सकता ?1. लेखक का पेशा क्या है ?2. दुनिया के बारे में लेखक ने कैसे जाना है ?3. लेखक ने किसी लेख में हिंदुस्तान के जवानों के विषय में क्या पढ़ा था ?4. परिवेश में किस बात का हल्ला हो गया है ?5. किस पर वसंत का प्रभाव दिखाई नहीं देता ? |
|
Answer» 1. पढ़ना-लिखना लेखक का पेशा है । 2. पोथियों के सहारे लेखक ने दुनिया के बारे में थोड़ा बहुत जाना है । 3. लेखक ने पढ़ा है कि हिन्दुस्तान के जवानों में कोई उमंग उत्साह नहीं है । 4. बसंत के आने का हल्ला हो गया है। 5. पेड़-पौधों पर वसंत का कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा था । |
|