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पद्यांश: अति मलीन वृषभानु कुमारी।हरि श्रम जल भीज्यौ उर अंचल, तिहि लालच न धुवावतिसारी।।अध मुख रहति, अनत नहिं चितवति, ज्यौ गथ हारे थकितजुवारी।छूटे चिकुर बदन कुम्हिलाने, ज्यौं नलिनी हिमकर की मारी।। |
Answer» ONG>Answer:yae KON sa GANA hai ????????? |
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