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फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है? |
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Answer» फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं। वे भारतीय संस्कृति के रंग में पूरी तरह से रंग गए थे। उनसे अपने देश का नाम पूछने पर वे भारत को ही अपना देश बताते थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति के महानायक राम और राम-कथा को अपने शोधप्रबंध का विषय चुना। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत दोनों भाषाओं का ज्ञान अजित किया और वे दोनों भाषाओं के विभागाध्यक्ष बने । उन्होंने प्रसिद्ध अंग्रेजी-हिन्दी शब्द कोश लिखा । हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के विषय में प्रयत्नशील रहते थे। इसके लिए वे अकाट्य तर्क देते थे। जो हिन्दी भाषी होकर भी हिन्दी भाषा की उपेक्षा करता तो वे बड़े दुःखी होते थे। ‘परिमल’ के सदस्यों के घर भारतीय उत्सवों और संस्कारों में भाग लेते थे। लेखक के पुत्र का अन्नप्रासन संस्कार उन्हीं के हाथों सम्पन्न हुआ। उपरोक्त बातों को देखते हुए कहा जा सकता है कि फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं। |
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