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फादर बुल्के की अंतिम यात्रा पर उमड़ती हुई भीड़ पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

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फादर बुल्के की मृत्यु जहरबाद से हुई थी। उन्होंने सारा जीवन दूसरों को स्नेह और वात्सल्य देने में लुटा दिया। सभी स्नेहीजनों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित किया। उनको जाननेवाले या मित्रगण उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानते थे। अत: उनकी अंतिम यात्रा में असंख्य लोग आए। विदेश से आए इस व्यक्ति के प्रति लोगों में इतना लगाव था कि वे अंतिम दर्शन करने चले आए और सबकी आँखों में आसू थे।

उनकी अंतिम यात्रा मैं जैनेन्द्र, विजयेन्द्र, स्नातक, अजित कुमार, डॉ. निर्मला, डॉ. सत्यप्रकाश, डॉ. रघुवंश जैसे विज्ञ जन उपस्थित थे। स्वयं फादर बुल्के ने भी नहीं सोचा होगा कि उनकी मृत्यु पर इतने लोग आंसू बहाएंगे। फादर बुल्के की अंतिम यात्रा पर उमड़नेवाली भीड़ उनके अपने स्नेहीजन थे जो उनसे बेहद प्रेम करते थे। वे सभी साहित्य प्रेमी थे।



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