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फादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। अथवा फादर कामिल बुल्के के चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

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फादर कामिल बुल्के मूल रूप से बेल्जियम के रेम्सचैपल के रहनेवाले थे। उन्होंने इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष की पढ़ाई छोड़कर संन्यासी बनकर भारत आने का निर्णय लिया। फादर बुल्के एक संन्यासी थे, किन्तु, पारम्परिक अर्थों से भिन्न । वे जिससे एक बार रिश्ता बना लेते थे, उसे जिन्दगी भर तोडते नहीं थे। वे अपने हर स्नेहीजनों से मिलने का समय निकाल लेते थे, मौसम चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों। लोगों के घर-परिवार के बारे में, निजी दुःख-तकलीफ के बारे में पूछना उनका स्वभाव था।

बड़े से बड़े दुःख में सांत्वना के दो शब्द सुनना, सामनेवाले व्यक्ति को एक नई आशा और रोशनी से भर देता था। वे अक्सर अपनी स्नेहमयी माँ को याद करते थे। उनकी कर्मभूमि भले भारत की धरती थी, वे अपनी जन्मभूमि से बेहद प्यार करते थे। उनके मन में अपने देश के लिए आदर और सम्मान के भाव थे। फादर ने भारत आकर अपना सारा जीवन हिन्दी समाज तथा भारत के विकास में समर्पित कर दिया । उन्होंने भारत के प्रति एक सच्चे देशभक्त तथा हिन्दी भाषा-प्रेमी के रूप में अपना धर्म निभाया। फादर बुल्के वास्तव में अविस्मरणीय व्यक्ति थे।



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