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फादर कामिल बुल्के की साहित्य-साधना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» फादर कामिल बुल्के इंजीनियरिंग के छात्र थे। उन्होंने तीसरे वर्ष में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी और भारत आ गए। उन्होंने सन्यास लेकर भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया । यहाँ आकर उन्होंने दो वर्ष तक ‘जिसेट संघ’ में रहकर धर्माचार की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 9-10 वर्ष दार्जिलिंग में रहकर पढ़ाई की, फिर कोलकाता से बी.ए. और इलाहाबाद से एम.ए, किया । सन् 1950 में उन्होंने अपना शोधप्रबंध ‘रामकथा : उत्पत्ति और विकास’ पूरा किया। उन्होंने मातरलिंक के प्रसिद्ध नाटक ‘ब्लूबर्ड’ का हिन्दी अनुवाद ‘नीलपंछी’ नाम से किया। बाद में उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज में रहकर अपना प्रसिद्ध अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश तैयार किया। उन्होंने बाईबिल का हिन्दी में अनुवाद किया। इस प्रकार फादर कामिल बुल्के का साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। |
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