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‘फिर मूढ़ न क्यों जग जो इस पर भी सीखे?’ -सांसारिक ज्ञान के बारे में कवि का क्या विचार है?अथवाकवि ने संसार को मूर्ख क्यों कहा है?

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कवि ने संसार को मूढ़ (मूर्ख) माना है क्योंकि लोग उस सांसारिक ज्ञान के पीछे पड़े हैं जो उन्हें सत्य तक नहीं पहुँचा सकता। वे परमात्मा तक पहुँचाने वाले सच्चे आत्मिक ज्ञान की उपेक्षा कर रहे हैं। अनुपयुक्त साधन (भौतिक ज्ञान) को अपनाकर सत्य (परमात्मा) को पाने की कामना करने वाला यह संसार मूर्ख ही तो है।



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