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पखापखी के कारनँ, सब जग रहा भुलान।निरपन होइ के हरि भजै, सोई संत सुजान ।भावार्थ : पक्ष और विपक्ष के चक्कर में पड़कर लोग जाति, धर्म और संप्रदाय में बँट गए हैं। वे अपने पक्ष को श्रेष्ठ मानते हैं और दूसरे की निंदा करते हैं। इसी सांसारिक पचड़े में पड़कर वे अपने जीवन के असली उद्देश्य से भटक गए हैं। कबीर कहते हैं कि जो धर्म-संप्रदाय के चक्कर में पड़े बिना प्रभु-भक्ति करते हैं, वास्तव में वे संत हैं, ज्ञानी हैं।1. पनापनी के कारण संसार की क्या स्थिति हो गई है ?2. निष्पक्ष होकर हरि भक्ति कौन करता है ?3. प्रस्तुत दोहे का केन्द्रीय भाव बताइए।4. ‘सोई संत सुजान’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?5. ‘पखापनी’ और ‘निरपन’ शब्दों का शुद्ध रूप लिखिए। |
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Answer» 1. पखापरनी के कारण संसार जाति, धर्म और संप्रदाय में बँट गया है। लोग अपने मूल उद्देश्य को भटक गए हैं। वे अपने पक्ष को श्रेष्ठ मानते हैं और दूसरे की निंदा करते हैं। 2. निष्पक्ष होकर हरि भक्ति वे करते हैं जो सच्चे ज्ञानी हैं। 3. प्रस्तुत दोहे के माध्यम से कबीर कहना चाहते हैं कि मनुष्य को पक्ष-विपक्ष के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए अर्थात् हिन्दू-मुसलमान के चक्कर में न पड़कर प्रभु-भक्ति करनी चाहिए। 4. ‘सोई संत सुजान’ में अनुप्रास अलंकार है। 5. पखापनी – पक्ष-विपक्ष |
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