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Powerful speech on republic day in hindi

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ंविधान ने देश के हर नागरिक को समान अधिकार दिए हैं, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेद नहीं किया। यही कारण है कि आजादी से पहले जहां महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय थी, वहीं आज वे सबल, सशक्त, आत्मनिर्भर हैं और भारतीय गणतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभा रही हैं। आजादी मिलने के बाद जब हम एक गणतंत्र बने तो देश की आधी आबादी को भी संविधान ने समान अधिकार दिए। संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर का कहना था, ‘मैं किसी समुदाय की प्रगति, महिलाओं ने जो प्रगति हासिल की है, उससे मापता हूं।’ इसी तरह देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का कहना था, ‘अगर हमें समाज का विकास करना है तो महिलाओं का उत्थान करना होगा। महिलाओं का विकास होने पर समाज का विकास स्वयं हो जाएगा।’ यही कारण रहा होगा कि जब संविधान बनाया गया तो महिलाओं के हितों का पूरा ध्यान रखा गया। संविधान प्रदत्त अधिकारों के बल पर ही आज देश की आधी आबादी सबल बनी, प्रगति पथ पर अग्रसर हुई...आज हम देखते हैं कि महिलाएं जागरूक, आत्मविश्वासी, सुशिक्षित, स्वावलंबी और प्रगतिशील हैं और भारतीय गणतंत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। लेकिन यह संभव हुआ, महिलाओं को संविधान द्वारा मिले शिक्षा के अधिकार के कारण। जैसा हम सभी जानते हैं कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व भारतीय समाज में स्त्रियों की दशा अच्छी नहीं थी। अशिक्षा, घर के पुरुषों पर आर्थिक निर्भरता के कारण उनकी स्थिति दोयम दर्जे की थी। यह स्थिति उनके विकास में, प्रगति में सबसे बड़ी बाधक थी। इस बात को देश के नीति निर्माण करने वालों ने बखूबी समझा और स्त्री-पुरुष दोनों को समान संवैधानिक अधिकार दिए। आजादी के वक्त देश में महज छह फीसद महिलाएं ही साक्षर थीं लेकिन शिक्षा के अधिकार के बल पर देश में स्त्रियों की दशा में सुधार हुआ। संविधान से मिले शिक्षा के अधिकार के बलबूते ही आज महिला शिक्षा का आंकड़ा बहुत बढ़ गया है।शिक्षा और साक्षरता के कारण ही देश में महिलाओं ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की जारी रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। शिक्षण संस्थानों तक लड़कियों की पहुंच लगातार बढ़ रही है। एक दशक पहले शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 55.1 प्रतिशत थी, जो अब बढ़ कर 68.4 तक पहुंच गई है यानी इस क्षेत्र में 13 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। शिक्षा के कारण महिलाएं, बालिकाएं शिक्षित हुईं, जागरूक हुईं तो वह कुरीतियों का विरोध भी कर पा रही हैं,इसी कारण बाल विवाह जैसी कुरीतियों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कानूनन अपराध घोषित किए जाने तथा सामाजिक तौर पर लगातार जागरुकता फैलाने के बावजूद बाल विवाह का चलन अब भी बरकरार है। लेकिन संतोष की बात है कि इसमें गिरावट आई है। 2005-06 में देश में 18 वर्ष से कम उम्र में शादी का प्रतिशत 47.4 था जो 2015-16 में घट कर 28.8 पर आ गया है। इस सर्वेक्षण के अनुसार देश में महिला शिक्षा और जागरुकता का असर घरेलू हिंसा पर भी पड़ा है। अब इस तरह के मामले पहले से कम हुए हैं। वैवाहिक जीवन में हिंसा झेल रही महिलाओं का प्रतिशत 37.2 से घटकर 28.8 प्रतिशत रह गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, बैंकिंग व्यवस्था में स्त्रियों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है। एक दशक पहले सिर्फ 15 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना बैंक खाता था। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अब 53 प्रतिशत महिलाएं बैंकों से जुड़ चुकी हैं। इसी तरह आंकड़ों के अनुसार लगभग 38 प्रतिशत महिलाएं अकेली या किसी के साथ संयुक्त रूप से घर या जमीन की मालकिन हैं। ऐसा इसलिए मुमकिन हुआ है क्योंकि महिलाएं शिक्षित होने पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनीं। यह आर्थिक आत्मनिर्भरता देश के विकास में भी बहुत सहायक है। इससे हमारे जीडीपी ग्रोथ पर सकारात्मक असर होगा।  इतने सकारात्मक परिवर्तनों के बाद भी आधी आबादी को अपने संवैधानिक अधिकारों को अभी भी समझना और जानना बाकी है। जब वे अपने संवैधानिक अधिकारों को जान जाएंगी, उनका प्रयोग अपनी प्रगति के लिए करेंगी तो देश का गणतंत्र और मजबूत होगा। आजादी के बाद कई महिलाएं विभिन्न राज्यों की मुख्यमंत्री बन चुकी हैं। वर्तमान दौर की बात करें तो देश की राजनीति में सुषमा स्वराज, निर्मला सीतारमण, सुमित्रा महाजन, सोनिया गांधी, मायावती और ममता बनर्जी जैसी महिला राजनेता एक अलग पहचान रखती हैं। वे आधी आबादी के हितों को लेकर प्रतिबद्ध नजर आती हैं, साथ ही देश के गणतंत्र को मजबूत बनाने में भी योगदान दे रही है।इसी तरह प्रशासनिक सेवाओं में भी महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हो रही हैं और देश को आगे ले जाने में योगदान दे रही हैं।  आम महिलाएं भी अपने मताधिकार का प्रयोग अपनी इच्छा से कर रही हैं। इसी कारण आज महिलाएं मौजूदा सरकार और विपक्षी पार्टियों के लिए एक मजबूत वोट बैंक हैं। सभी राजनैतिक दल महिला हितों को महत्व दे रहे हैं और उनके विकास से जुड़ी योजनाएं लाने का आश्वासन देती हैं।hope it helpsplz mark BRAINLIEST...



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