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प्राचीनकाल में ध्रुपद गायक को कहा जाता था​

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ध्रुपद एक गंभीर प्रकृति की गायन शैली है। ध्रुव शब्द का अर्थ होता है स्थिर, अचल, पवित्र आदि। इस सम्बंध में यह भी माना जाता है की धुपद का विकास ध्रुवा गीतों से हुआ,जिसके विषय में भरतमुनी ने अपने नाट्य शास्त्र में लिखा है। इन ध्रुवा गीतों से ही समय के परिवर्तन के साथ ध्रुपदों का विकास हुआ। आज 14 मार्च को 'इंटरनेशनल डे ऑफ ध्रुपद' मनाया जाता है। उस्ताद जिया मोइनुद्दीन डागर के जन्मदिवस के रूप में देशभर में ध्रुपद दिवस का आयोजन किया जाता है। शहर में स्थित ध्रुपद संस्थान में पिछले तीन वर्षों से विशेष दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विशेष रूप से दुनिया के अनेक ध्रुपद गायक अपने ही स्थान से फेसबुक पर 14 मार्च को अपनी प्रस्तुति लाइव प्रसारित करेंगे। हजारों ध्रुपद प्रेमी इस दिन इन कार्यक्रमों को लाइव देखेंगे और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे। प्रस्तुतियों को फेसबुक पर 'अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद दिवस' पृष्ठ के साथ-साथ 'ध्रुपद संस्थान भोपाल' पृष्ठ पर सुबह 9.30 से दोपहर 12.30,(आईएसटी,पीएम) 2 से 5 बजे, (आईएसटी, पीएम) 6 से 10बजे तक 3 समय स्लॉट में प्रसारित किया जाएगा।

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