प्राकृतिक भू-क्षरण – प्राकृतिक भू-क्षरण प्रकृति द्वारा होता है। इसकी गति धीमी व विनाशरहित होती है। इसमें जितनी मिट्टी बनती है उतना ही कटाव होता है। जिससे सन्तुलन बना रहता है। इससे भूपटल पर पठार, मैदान, घाटियाँ और विभिन्न प्रकार की मिटूटियाँ बनती है।।
त्वरित भू-क्षरण – चरागाहों में उगी घास की अनियमित चराई, वनों की अंधाधुंध कटाई आदि से भू-सतह पर स्थित वनस्पतियाँ नष्ट हो जाती हैं। जिसके कारण त्वरित भू-क्षरण होता है। मानव इसके लिए उत्तरदायी है।