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प्रदूषण संबंधित प्राकृतिक विपदाओं के मुख्य रूप कौन-कौन से हैं?

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प्रदूषण संबंधित प्राकृतिक विपदाओं के अनेक रूप होते हैं। भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, बाढ़ अथवा ज्वारभाटीय लहरें (जैसे सुनामी लहरें) इत्यादि प्राकृतिक विपदाएँ समाज को पूर्ण रूप से बदलकर रख देती हैं। यह बदलाव, अपरिवर्तनीय अर्थात् स्थायी होते हैं तथा चीजों को वापस अपनी पूर्वावस्था में नहीं आने देते। साथ ही, प्रदूषण से संबंधित अनेक प्राकृतिक विपदाओं के उदाहरण आज हमारे सामने हैं। इन सब में वायु प्रदूषण से संबंधित विपदाएँ; जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण की तुलना में कहीं अधिक हुई हैं। पूर्व सोवियत संघ के यूक्रेन प्रांत में हुए चेरनोबिल काण्ड तथा भारत में भोपाल गैस कांड वायु प्रदूषण से संबंधित प्रमुख विपदाओं के उदाहरण हैं।

3 दिसम्बर, 1984 ई० की रात को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कीटनाशक फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट नामक गैस के रिसाव से 4,000 लोगों की मृत्यु हो गई तथा 2,00,000 व्यक्ति हमेशा के लिए अपंग हो गए। इस प्रकार की दुर्घटना रोकने हेतु इस फैक्ट्री में कंप्यूटरीकृत अग्रिम चेतावनी व्यवस्था नहीं थी जो अमेरिका स्थित इसी कंपनी के प्रत्येक प्लांट का एक अनिवार्य हिस्सा है। ध्वनि प्रदूषण बहरेपन को तो मृदा प्रदूषण अनेक रोगों को जन्म देता है। इसीलिए प्रदूषण से संबंधित प्राकृतिक विपदाओं के सभी रूप विनाशकारी होते हैं। भारत में प्रतिवर्ष घरेलू वायु प्रदूषण से मरने वाले लोगों की संख्या लाखों में है।



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