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परित्यक्त चीनी किले से जब हम चलने लगे, तो एक आदमी राहदारी माँगने आया । हमने वह दोनों चिटें उसे दे दी । शायद उसी दिन हम थोड्ला के पहले के आखिरी गाँव में पहुंच गए । यहाँ भी सुमति के जान-पहचान के आदमी थे और भिखमंगे रहते भी ठहरने के लिए अच्छी जगह मिली । पाँच साल बाद हम इसी रास्ते लोटे थे और भिखमंगे नहीं, एक भद्र यात्री के देश में घोड़ों पर सवार होकर आए थे; किंतु उस वक्त किसी ने हमें रहने के लिए जगह नहीं दी, और हम गाँव के एक सबसे गरीब झोपड़े में ठहरे थे । बहुत कुछ लोगों की उस वक्त की मनोवृत्ति पर ही निर्भर है, खासकर शाम के वक्त छङ् पीकर बहुत कम होश-हवास को दुरुस्त रखते हैं ।1. राहदारी मांगनेवाले को लेखक ने क्या दिया ?2. भिखमंगा होने पर भी लेखक को रहने के लिए अच्छी जगह क्यों मिली ?3. लेखक भद्रवेश में होने पर भी पाँच वर्ष पूर्व कहाँ ठहरे थे ?4. ‘जान-पहचान’ और ‘राहदारी’ में कौन-सा समास है ? |
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Answer» 1. राहदारी मांगनेवाले को लेखक ने दो चिटें दी । 2. भिखमंगा होने पर भी लेखक को रहने के लिए अच्छी जगह सुमति की जान-पहचान का आदमी होने के कारण मिली । 3. पाँच वर्ष पूर्व लेखक भद्र यात्री के रूप में आये थे । जान-पहचान न होने के कारण लेखक को सबसे गरीब झोपड़े में रुकना पड़ा था । 4. जान-पहचान → द्वन्द्व समास |
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