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Answer» पर्यावरण को शुद्ध रखने के उपाय पर्यावरण प्रदूषण की समस्या आज इतनी विस्फोटक हो चुकी है कि मानव अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया है। वर्तमान समय में हमें न तो शुद्ध वायु, जल तथा भोजन मिल रहा है और न शुद्ध पर्यावरण प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वास्तव में, पर्यावरण के अशुद्ध होने से इस समस्या का जन्म हुआ है। अत: पर्यावरण को शुद्ध रखकर ही प्रदूषण की घातक समस्या का मुकाबला किया जा सकता है। पर्यावरण को निम्नलिखित उपायों द्वारा शुद्ध रखा जा सकता है (क) वायु-प्रदूषण के उपाय – पर्यावरण प्रदूषण में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण वायु-प्रदूषण है। वायु-प्रदूषण मनुष्य के जीवन और स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक है। वायु-प्रदूषण सबसे अधिक परिवहन के साधनों, उद्योगों व वनों की कटाई से होता है। अतः वायु-प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक है कि 1. भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ नगरीकरण और औद्योगीकरण बढ़ रहा है, वायु प्रदूषण पर नियन्त्रण पाने के लिए वायुमण्डल की जाँच कराना प्रथम आवश्यक कार्य है, जिससे कि प्रदूषण के संकेन्द्रण को सीमा से अधिक बढ़ने से रोका जा सके। 2. धुआँ उगलने वाले परिवहन के साधनों की वृद्धि को रोका जाए तथा परिवहन के धुएँ की माप धुआँ मीटरों से की जाए। मोटर-परिवहन एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए। 3. धुआँ उगलने वाली सरकारी व गैर-सरकारी गाड़ियों के लाइसेन्स तुरन्त जब्त कर लिये जाएँ और उन्हें शिकायत दूर करने और पूरी जाँच के बाद ही दोबारा प्रमाण-पत्र दिया जाए। रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशक दवाइयों का उपयोग आवश्यकतानुसार सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। 4. पर्यावरण में सन्तुलन बनाये रखने एवं वायु-प्रदूषण को दूर करने के लिए वन-क्षेत्र में वृद्धि की जाए तथा सामाजिक वानिकी को महत्त्व दिया जाए। इसके साथ-साथ वनों की अनियमित एवं अनियन्त्रित कटाई पर रोक लगायी जाए। 5. पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले उद्योगों को नगरों के मध्य स्थापित करने की अनुमति न दी जाए। बड़े कल-कारखाने नगरों से दूर स्थापित कराए जाएँ तथा उनसे प्रदूषण मुक्त सभी आवश्यक शर्तों का कठोरता से पालन कराया जाए। इसके साथ ही कल-कारखानों से धुआँ उगलने वाली चिमनियों पर प्रदूषण-रोधक यन्त्र (फिल्टर) लगाना अनिवार्य किया जाए। 6. नगरों के मध्य कूड़ा-करकट, मल, व्यर्थ पदार्थ, औद्योगिक अवशिष्ट व अपमार्जक आदि न डाले जाएँ। उनका उपयोग विद्युत बनाने में कराया जाए। 7. भारत सरकार का वायु प्रदूषण नियन्त्रण अधिनियम, 1981, जो उत्तर : प्रदेश में भी लागू है, का कड़ाई से पालन कराया जाए। (ख) जल-प्रदूषण के उपाय – पर्यावरण को अशुद्ध करने में जल-प्रदूषण भी सबसे बड़ी समस्या है। जल को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए – ग्रामीण अंचल में – ⦁ शौचालय तथा मल के गड्ढे खोदकर बनाये जाएँ। ⦁ मल को नदियों व तालाबों में न बहाया जाए। इससे बेहतर खाद मिलेगा और जल-प्रदूषण की समस्या का स्वत: हल मिल जाएगा। ⦁ कुओं पर जगत अवश्य बनायी जाए। ⦁ जल को उबालकर तथा कुओं में दवाएँ डालकर शुद्ध किया जाए। नगरीय क्षेत्रों में – ⦁ जल संयन्त्रों से पानी साफ किया जाए और उनकी समुचित देखभाल की व्यवस्था की जाए। ⦁ नदियों में कूड़ा-करकट, मल, व्यर्थ पदार्थ, औद्योगिक अवशिष्ट वे अपमार्जक न डाले जाएँ। ⦁ नदियों में गिराये जाने वाले अवशिष्ट का उपचार किया जाए। प्रत्येक कारखाने पर औद्योगिक अवशिष्ट के लिए उपचार संयन्त्र लगाने की पाबन्दी लगायी जाए। इसके लिए कानून बनाये जाएँ और उनका कड़ाई से पालन कराया जाए। ⦁ नदियों में अधजले शवों को बहाना रोका जाए और उनके लिए विद्युत शवदाह-गृहों का निर्माण किया जाए। ⦁ देश में जल-प्रदूषण निवारण एवं नियन्त्रण अधिनियम, 1974 बना हुआ है, जो उत्तर प्रदेश में भी लागू है। इसको प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। ⦁ जल-प्रदूषण रोकने के लिए उसकी चौकसी एवं निगरानी के लिए समितियाँ गठित हों, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता, सरकारी अधिकारी, प्रदूषण निरोधक समितियों के सदस्य तथा प्रदूषित क्षेत्रों के नागरिक होने चाहिए। ⦁ जन-सामान्य को इस समस्या के प्रति जाग्रत किया जाए और उनकी सक्रिय साझेदारी प्राप्त की जाए। ⦁ नदियों में पशुओं को ने नहलाया जाए तथा नदी इत्यादि में वस्त्रों की धुलाई पर रोक लगायी जाए। ⦁ कुओं को ढककर रखा जाए तथा ढके हुए नल लगाकर पेयजल की व्यवस्था की जाए। ⦁ नगरों में पेयजल का वितरण जल को शुद्ध करके किया जाए। (ग) ध्वनि-प्रदूषण के उपाय – पर्यावरण को ध्वनि प्रदूषण भी प्रदूषित कर रहा है। ध्वनिप्रदूषणकोरोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं ⦁ वायुयानों, रेलों, बसों, कारों, स्कूटरों एवं मोटर साइकिलों आदि में शोर-शमन यन्त्र (साइलेंसर) ठीक काम करते हैं या नहीं इसकी पूरी देख-रेख की जाए। जहाँ ये ठीक काम न कर रहे हों वहाँ इनका सड़क पर चलना तुरन्त बन्द कराया जाए और इस व्यवस्था को न मानने वालों को दण्डित किया जाए। ⦁ विदेशों की भाँति व्यर्थ एवं अनावश्यक रूप से हॉर्न बजाना रोका जाए। अनिवार्य स्थिति में ही हॉर्न बजाने की अनुमति हो। शहरों में ‘खामोश क्षेत्र घोषित किया जाए। ⦁ कल-कारखाने व रेलवे स्टेशन आदि आवासीय क्षेत्रों से बाहर स्थापित कराए जाएँ तथा ध्वनि उत्पन्न करने वाली मशीनों के प्रयोग को सीमित किया जाए। ⦁ वाद्य-यन्त्रों व लाउडस्पीकरों आदि के प्रयोग तथा उनकी तीव्र ध्वनि को नियन्त्रित एवं प्रतिबन्धित किया जाए। (घ) अन्य उपाय- ⦁ पर्यावरण को अशुद्ध करने में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि भी मुख्य कारण है। अतः जनसंख्या-वृद्धि पर नियन्त्रण किया जाए। ⦁ प्राकृतिक पर्यावरण के साथ अधिक छेड़छाड़ न की जाए, क्योंकि प्राकृतिक पर्यावरणीय कारकों के सन्तुलन को सीमा से अधिक बिगाड़ने पर भारी क्षति उठानी पड़ती है। वनों की अन्धाधुन्ध कटाई को रोका जाए। ⦁ नगरीकरण के विस्तार को रोका जाए। ⦁ पर्यावरणीय शिक्षा का प्रचार एवं जागृति जन-मानस में की जाए। ⦁ उद्योग एवं नगर के विकास में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी सम्बन्धी नीति का समावेश किया जाए। ⦁ प्राकृतिक संसाधनों का शोषण योजनाबद्ध ढंग से किया जाए। ⦁ पर्यावरण सन्तुलन को बिगड़ने से बचाया जाए। ⦁ पर्यावरण सुरक्षा के नियम अधिक कठोर बनाये जाएँ। पर्यावरण को शुद्ध बनाये रखने के सम्बन्ध में केन्द्र सरकार द्वारा किये गये प्रयास पर्यावरण को शुद्ध रखने के सम्बन्ध में केन्द्र सरकार ने निम्नलिखित उपाय किये हैं ⦁ जल-प्रदूषण निवारण के लिए केन्द्र सरकार ने जल-प्रदूषण निवारण एवं नियन्त्रण अधिनियम, 1974 बनाया है। ⦁ केन्द्र सरकार ने गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए सन् 1986 में एक महत्त्वाकांक्षी योजना प्रारम्भ की, जिसके अन्तर्गत ‘गंगा प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड का गठन किया गया लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की योजना बनायी जिससे नयीं सीवर लाइन, सीवेज पम्पिंग स्टेशन आदि का निर्माण कराया गया। कारखानों के मालिकों को औद्योगिक अवशिष्ट उपचार के यन्त्र लगाने को कहा गया। ⦁ भारत की अन्य नदियों; जैसे यमुना, गोमती तथा अन्य प्रदेशों; जैसे केरल, ओडिशा, महाराष्ट्र और राजस्थान की कुछ नदियाँ, जो प्रदूषित हो गयी हैं; को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भी योजना बनायी गयी, जिसके अन्तर्गत विद्युत शवदाह-गृहों का निर्माण, कारखानों के अवशिष्ट पदार्थों को नदियों में न गिराना आदि कार्यों पर बल दिया गया। ⦁ परमाणु अस्त्रों को परीक्षण जो समुद्र में किया जाता है, उसको सीमित एवं नियन्त्रित करना। ⦁ वायु-प्रदूषण हेतु वायु-प्रदूषण नियन्त्रण अधिनियम, 1981 बनाया हुआ है। वायु-प्रदूषण पर नियन्त्रण करने के लिए मोटर परिवहन ऐक्ट, नूयी औद्योगिक नीति एवं 1978 ई० में घोषित देश की नवीन वन नीति में पर्यावरण संरक्षण, वन क्षेत्रफल में वृद्धि एवं वनों की अनियमित एवं अनियन्त्रित कटाई को रोकना आदि पर विशेष बल दिया गया है। ⦁ शुद्ध पर्यावरण बनाये रखने के लिए केन्द्र सरकार ने पर्यावरण मन्त्रालय की स्थापना की हुई है, जो पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करने का कार्य करता है। ⦁ केन्द्र सरकार को परिवार कल्याण मन्त्रालय’ जनसंख्या शिक्षा पर विशेष बल दे रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या हल हो सके, क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का महत्त्वपूर्ण कारण तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या ही है। ⦁ सन् 1985 में बहुप्रतिष्ठित कार्य योजना ‘गंगा एक्शन प्लान’ प्रारम्भ की गयी, जिसमें है 261 करोड़ व्यय करने का प्रावधान किया गया था। गंगा की योजना के दूसरे चरण हेतु केन्द्र सरकार ने 421 करोड़ स्वीकृत किये थे। इस योजना के अन्तर्गत यमुना, गोमती तथा दामोदर नदियों को प्रदूषण से मुक्त करना है। उक्त योजना जून, 1993 से प्रारम्भ की गयी थी, साथ ही राज्य सरकारों से योजना को कार्यरूप प्रदान करने हेतु कहा गया था। इस योजना के अन्तर्गत हरियाणा के यमुना नगर, जगाधरी, करनाल, पानीपत, सोनीपत, गुड़गाँव, फरीदाबाद; उत्तर : प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, नोएडा, मथुरा, वृन्दावन, आगरा, इटावा, लखनऊ, सुल्तानपुर तथा जौनपुर और दिल्ली में यमुना नदी, हिंडन तथा गोमती नदियों की सफाई के लिए योजनाएँ चलाई जाती हैं। 9. वायु-प्रदूषण नियन्त्रण हेतु केन्द्रीय नियन्त्रण बोर्ड ने 1993 ई० तक देश के 92 प्रमुख नगरों में वायु गुणवत्ता की नियमित चेकिंग के लिए 290 स्टेशन स्थापित किये हैं। नयी रणनीति – पहली बार सरकार ने बढ़ते वाहन-प्रदूषण को रोकने के लिए नयी रणनीति बनायी है, जिसके अन्तर्गत निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं| ⦁ वाहन उत्सर्जन मानक कड़े बनाये गये थे जिन्हें दो चरणों में सन् 1996 व 2000 ई० से लागू करने का प्रस्ताव था। ⦁ वाहन-प्रदूषण को कम करने के लिए लेड मुक्त पेट्रोल, कैटालिटिक कन्वर्टर व कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सी० एन० जी०) के पहलुओं पर तेजी से विचार किया गया है। पर्यावरण को शुद्ध बनाये रखने के लिए उत्तर : प्रदेश सरकार द्वारा किये गये प्रयास पर्यावरण को शुद्ध बनाये रखने के लिए उत्तर : प्रदेश सरकार ने निम्नलिखित प्रयास किये हैं 1. उत्तर प्रदेश शासन ने पर्यावरण सम्बन्धी समस्याओं पर गम्भीरतापूर्वक विचार करने तथा उसके निदान के लिए पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी निदेशालय की स्थापना की। 2. शासन को पर्यावरण एवं प्रदूषण सम्बन्धी परामर्श देने के लिए मुख्यमन्त्री जी की अध्यक्षता में एक बोर्ड का गठन किया गया है। इसके सदस्य विभिन्न विभागों से सम्बन्धित विशेषज्ञ तथा मन्त्रिगण हैं। इस बोर्ड को जलवायु एवं मिट्टी के प्रदूषण, खनन, वातावरण की गन्दगी, नये उद्योगों की स्थापना, शहरों का विकास, ऐतिहासिक इमारतों की प्रदूषण से सुरक्षा इत्यादि कार्य निर्दिष्ट किये गये हैं। यह बोर्ड पर्यावरण सम्बन्धी ऐसे नीति-निर्धारण में शासन को आवश्यक परामर्श भी देता है जो विकास कार्यों के तालमेल में हो। इस बोर्ड तथा इसकी कार्यकारिणी समिति ने शासन को कई परामर्श दिये हैं, जिन पर सरकार कार्य कर रही है, जिनमें से निम्नलिखित कार्य उल्लेखनीय हैं ⦁ विकास विभागों की वृहत् योजनाओं का पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी सन्तुलन की दृष्टि से पर्यवेक्षण किया जाए। ⦁ पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के सन्तुलन हेतु वर्तमान अधिनियमों एवं नियमों में संशोधन किया जाए। ⦁ उद्योग एवं नगर विकास में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी सम्बन्धी नीति का समावेश किया जाए। ⦁ पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी निदेशालय द्वारा प्रदेश के पर्यावरण संरक्षण के लिए एक वृहत् कार्यक्रम तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम के मुख्य अंग निम्नवत् हैं (क) भूमि एवं जल प्रबन्ध। (ख) प्राकृतिक संसाधन, ऐतिहासिक इमारतों, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों का संरक्षण। (ग) पर्यावरण सम्बन्धी प्रदूषण। (घ) मानव बस्ती। (ङ) पर्यावरणीय शिक्षा एवं तत्सम्बन्धी ज्ञान की जन-मानस में जागृति। (च) पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के दृष्टिकोण से नियमों एवं अधिनियमों में संशोधन। संक्षेप में, प्रदेश सरकार पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करने के लिए उपर्युक्त सभी कार्य कर रही है। भारत सरकार का वायु प्रदूषण अधिनियम, 1981 जो अपने प्रदेश में भी लागू है, वायु-प्रदूषण पर नियन्त्रण कर रहा है। इसी प्रकार जल-प्रदूषण निवारण एवं नियन्त्रण अधिनियम, 1974 बना हुआ है, जो जल-प्रदूषण पर नियन्त्रण कर रहा है। प्रदेश में मोटर परिवहन ऐक्ट भी लागू है, जो धुआँ उगलने वाले एवं शोर करने वाले परिवहनों पर नियन्त्रण करके पर्यावरण को शुद्ध करने में सहायक है। पर्यावरण को शुद्ध रखने एवं पर्यावरण को संरक्षण प्रदान करने के लिए पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी विभाग, उत्तर : प्रदेश कार्यरत है।
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