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पर्यावरण प्रदूषण का सर्वप्रथम कारण मानव सभ्यता का विकास ही है।’ स्पष्ट कीजिए। या‘पारिस्थितिक-तन्त्र का पतन एवं पर्यावरण प्रदूषण’ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।यापर्यावरण प्रदूषण के कारणों को व्यक्त कीजिए। यावायु-प्रदूषण में मानव-जनित प्रदूषण की भूमिका पर प्रकाश डालिए। प्रदूषण के दो कारकों का उल्लेख कीजिए। 

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जैसे-जैसे मानव सभ्यता का विकास होता गया, वैसे-वैसे मानव की आवश्यकताएँ भी बढ़ती गयीं। अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य ने जंगल काटकर खेती करना प्रारम्भ किया। जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण अब इस खेती को नष्ट करके मनुष्य उस पर मकान बनाने लगा है और फैक्ट्रियों में कार्य करके आज अपनी आजीविका कमा रहा है। विकास की तेज गति से मनुष्य को जहाँ लाभ पहुंचे हैं, वहाँ दूसरी ओर कई नुकसान भी हुए हैं। प्रकृति का सन्तुलन डगमगाने लगा है, उसकी सादगी और पवित्रता नष्ट हो रही है। अपनी बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए मकान बनाने, खेती करने, ईंधन प्राप्त करने, पैसा बनाने तथा अन्य उपयोगों के लिए पेड़ों और जंगलों का सफाया आज भी लगातार हो रहा है। प्रतिदिन नयी-नयी सड़कें, गगनचुम्बी इमारते, मिल, कारखाने आदि बन रहे हैं और इस प्रक्रिया में प्राकृतिक साधनों का बहुत अधिक दोहन हो रहा है, हानिकारक रसायनों, गैसों व अन्य चीजों का बहुत इस्तेमाल हो रहा है। इससे पर्यावरण की प्राकृतिकता नष्ट हो रही है और प्रदूषण पनप रहा है। हजारों वर्षों से मानव-जीवन पर्यावरण के सन्तुलन के सहारे चलता रहा है। मानव ने अपनी सुख-सुविधाओं में वृद्धि हेतु पर्यावरण में इतना अधिक परिवर्तन कर दिया है कि इससे पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो गयी है। निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि पर्यावरण प्रदूषण का सर्वप्रमुख कारण मानव सभ्यता का विकास ही है

1. दहन – लकड़ी व विभिन्न प्रकार के खनिज ईंधनों (पेट्रोल, कोयला, मिट्टी का तेल आदि) की भट्टियों, कारखानों, बिजलीघरों, मोटरगाड़ियों, रेलगाड़ियों आदि में जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाई-ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, धूल तथा अन्य यौगिकों के सूक्ष्म कण प्रदूषक के रूप में वायु में मिल जाते हैं। मोटरगाड़ियाँ या ऑटोमोबाइल एक्सहॉस्ट (Automobile Exhaust) को सबसे बड़ा प्रदूषणकारी माना गया है। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड तथा अन्य विषैली गैसें निकलती हैं। ये विषैली गैसें सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में परस्पर क्रिया करके अन्य पदार्थ बनाती हैं, जो अत्यन्त हानिकारक होते हैं।

2. औद्योगिक अवशिष्ट – बड़े नगरों में कल-कारखानों से निकलने वाली अनेक गैसें, धातु के कण, विभिन्न प्रकार के फ्लुओराइड, कभी-कभी रेडियोसक्रिय पदार्थों के कण, कोयले के अज्वलनशील खनिज आदि वहाँ की वायु को इतना प्रदूषित कर देते हैं कि लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है। यह इसलिए होता है क्योंकि विभिन्न प्रकार के उद्योगों में अनेक प्रकार के रसायन प्रयोग में लाये जाते हैं।

3. धातुकर्मी प्रक्रम – खान से निकाले गये खनिजों (अयस्कों) से धातु प्राप्त करना धातु कर्म कहलाता है। इस प्रक्रम से जो धूल व धुआं निकलता है, उसमें क्रोमियम, बेरीलियम, आर्सेनिक, बैनेडियम, जस्ता, सीसा, ताँबा आदि के कण होते हैं, जो वायु को प्रदूषित करते हैं।

4. कृषि रसायन – कीटों व खरपतवारों को नष्ट करने के लिए फसलों पर जो रसायन (ऐल्ड्रीन, गैमेक्सीन आदि) छिड़के जाते हैं, उनमें से भी अनेक विषाक्त पदार्थ वायु में पहुँचते हैं, जो उसे विषाक्त कर देते हैं।

5. वृक्षों तथा वनों को काटा जाना – हरे पेड़-पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड को लेकर उसके बदले ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिससे वायुमण्डल में इन गैसों का सन्तुलन बना रहता है। अतः वनस्पतियों द्वारा पर्यावरण की शुद्धि होती है। आज हमने वनों तथा अन्य स्थानों के वृक्षों व झाड़ियों को अन्धाधुन्ध काटा है जिससे वायुमण्डल में उपस्थित गैसों का सन्तुलन बिगड़ गया है।

6. मृत पदार्थ – मरे हुए वनस्पति, जानवर या मनुष्य आदि वायुमण्डल में खुले छोड़ दिये जाएँ तो उन पर अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणु, जीवाणु व विषाणु उगेंगे जो वायु-प्रदूषण उत्पन्न करेंगे।

7. जनसंख्या विस्फोट – पर्यावरण प्रदूषण का यदि एक सबसे प्रमुख कारण देना हो तो हम जनसंख्या विस्फोट कह सकते हैं। यदि संसार की जनसंख्या इतनी अधिक नहीं हुई होती तो आज प्रदूषण की बात भी नहीं उठती। यह अनुमान किया जाता है कि गत 100 वर्षों में केवल मनुष्य ने ही वायुमण्डल में 36 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी है। यह मात्रा दिन-प्रति-दिन बढ़ती ही जा रही है।

8. परमाणु ऊर्जा – परमाणु ऊर्जा की प्राप्ति हेतु अनेक देश परमाणु विस्फोट कर रहे हैं और बहुत-से देश ऐसा करने के प्रयत्न में लगे हुए हैं। इस प्रयास के प्रक्रम में रेडियोसक्रिय पदार्थों को उठाने, चूरा करने, छानने, पीसने से कुछ वायु प्रदूषक (जैसे—यूरेनियम, बेरीलियम, क्लोराइड, आयोडीन, ऑर्गन, स्ट्रीशियम, सीजियम, कार्बन आदि) वायु में आ – मिलते हैं।

9. युद्ध – छोटे या बड़े देशों के मध्य जहाँ कहीं भी युद्ध होता है वहाँ का वातावरण गोलियाँ चलने, बम फटने एवं विषैले अस्त्र-शस्त्रों के प्रयोग से दूषित हो जाता हैं।



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