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पुल पर खड़े होकर ‘निराला’ जी क्या सोचते हैं? |
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Answer» पुल पर खड़े होकर सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ सोचते हैं कि इस सृष्टि का निर्माण करने वाले के नियम अटल हैं। यहाँ जो जैसा करता है उसे वैसे ही फल की प्राप्ति होती है। |
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