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पुस्तकालय पर निबंध लिखिए : |
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Answer» हमारे शास्त्रों में कहा गया है – “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते” अर्थात् ज्ञान के समान पवित्र दूसरी कोई वस्तु नहीं। अंग्रेजी में ज्ञान को ही सच्चा बल बताया गया है। ऐसे ज्ञान प्राप्ति के साधनों में पुस्तकालय एक है। यह ज्ञानप्रसार का सर्वश्रेष्ठ साधन है। पुस्तकालय का स्थूल अर्थ है – “पुस्तकों का घर’ या वह स्थान जहाँ पुस्तकों का संग्रह होता है। आजकल अनेक प्रकार के पुस्तकालय देखे जाते हैं। जिनको पढ़ने – लिखने का शौक होता है वे अपने घरों में निजी पुस्तकालय रखते हैं। स्कूल और कालेजों में विद्यार्थियों के उपयोग के लिए पुस्तकालय बनाये जाते हैं। कुछ पुस्तकालय गाँवो में या शहरों में आम जनता के उपयोग के लिए खोले जाते हैं। आजकल चलते – फिरते पुस्तकालय भी देखने में आते हैं। पुस्तकालय से अनेक लाभ हैं। पुस्तकालय ज्ञान का भंडार है। अच्छे पुस्तकालय से सभी प्रकार का, सभी विषयों का ज्ञान मिलता है। किसी भी विषय का ज्ञान पुस्तकालयों से प्राप्त कर सकते हैं। पुस्तकालय संसार के महान व्यक्तियों का, महात्माओं, विचारकों, कवियों, लेखकों का परिचय कराता है। महात्माओं, महापुरुषों के सत्संग से, अनेक विचारों से हमारे ज्ञान की वृद्धि होती है। पुस्तकालयों से समय का सदुपयोग होता है। अवकाश के समय को पुस्तकों के साथ बिताकर हम मन की चिंताओं को भूल सकते हैं। पुस्तकालय हमारे चरित्र निर्माण में भी सहायक होते हैं। पुस्तकालय राष्ट्र की निधि है। जिस देश में विद्या का जितना अधिक प्रसार होगा उस देश में पुस्तकालयों की संख्या अधिक होती है। पुस्तकालय देश की प्रगति में और सुधार में सहायक होता है। इसलिए सरकार पुस्तकालयों के निर्माण और उनकी उन्नति के लिए आर्थिक सहायता देती है। |
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