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पूँजी की आवश्यकता निश्चित करनेवाले परिबल समझाइए ।

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पूँजी की आवश्यकता को प्रभावित करनेवाले परिबल निम्न है :

  • धन्धे की स्थापना के लिए : धन्धाकीय इकाई की स्थापना के लिए किए जानेवाले विविध का खर्च जैसे कि इकाई की प्राथमिक और घनिष्ट (विस्तृत) जाँच के लिए और रजिस्ट्रेशन का प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज तैयार करने के लिए, कानूनी निष्णातों की फीस, रजिस्ट्रेशन फीस आदि खर्चों को निकालने के लिए पूँजी की आवश्यकता पड़ती है ।
  • स्थायी सम्पत्तियों को क्रय करने के लिए : धन्धाकीय इकाईयों में दीर्घ अवधि के लिए सम्पत्तियों में निवेश किया जाता है, जिसे स्थायी सम्पत्ति कहते हैं । ऐसी सम्पत्तियों में बार-बार परिवर्तन नहीं हो सकता । स्थायी सम्पत्तियों जैसे कि, जमीन, मकान, यंत्र, वाहन इत्यादि में बृहद प्रमाण में दीर्घकालीन पूँजी की आवश्यकता पड़ती है ।
  • दैनिक सम्पत्तियों के लिए : धन्धे में दैनिक प्रवृत्तियाँ बराबर चलती रहे इसके लिए कार्यशील पूँजी की आवश्यकता पड़ती है । जैसे कि कच्चा माल क्रय करने, वेतन-मजदूरी चुकाने, व्यापार की सहायक सेवाओं के अनुसंधान में चुकाने के लिए तथा तैयार माल के. स्टॉक में निवेश इत्यादि के लिए कार्यशील पूँजी की आवश्यकता पड़ती है ।
  • धन्धे के आधुनीकरण और विस्तार के लिए : धन्धाकीय इकाई में नई शोध-खोज होने के कारण आधुनीकरण, विस्तार और उत्पादन की नई टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए विपुल प्रमाण में पूँजी की आवश्यकता पड़ती है ।
  • आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए : धन्धाकीय इकाई को बहुत से आन्तरिक या बाह्य परिबल/तत्त्व प्रभावित करते है । जिसके कारण पूँजी की आकस्मिक आवश्यकता पड़ती है । जैसे कि कर्मचारियों की हड़ताल, सरकारी नीति में परिवर्तन, व्यापार में परिवर्तन, प्राकृतिक आपत्तियाँ इत्यादि परिबलों का सामना करने के लिए आकस्मिक पूँजी की आवश्यकता पड़ती है ।


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