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Answer» राज्य की उत्पत्ति का दैवी सिद्धान्त इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य का निर्माण ईश्वर ने किया है। राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है और उसी की इच्छानुसार शासन करता है। उसे समस्त शक्तियाँ तथा अधिकार ईश्वर से ही प्राप्त होते हैं। वह प्रजा के प्रति नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति भी उत्तरदायी होता है। राजा की आज्ञा का उल्लंघन ईश्वर की आज्ञा का उल्लंघन है। प्राचीन काल में भारत, मिस्र, यूनान तथा चीन आदि देशों में इस सिद्धान्त की विशेष मान्यता थी और राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता था। प्राचीन तथा मध्यकाल में राज्य पर धर्म का प्रभाव था। अतः धार्मिक दृष्टि से इस सिद्धान्त को मान्यता मिली। ईसाई धर्म के अनुसार, “राज्य की उत्पत्ति ईश्वर की इच्छा के अनुसार हुई है।’ यहूदियों के अनुसार, “ईश्वर ने स्वयं राज्य की स्थापना की है।” सेण्ट पॉल के शब्दों में, “राजा को ईश्वर ने बनाया है। अतः ईश्वर ने ही राज्य का निर्माण किया है।” संक्षेप में इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य ईश्वरीकृत है, धरती पर ईश्वर का अवतार है, राज्य के पास दैवीय अधिकार हैं, राजा की आज्ञा का पालन करना जनता को कर्तव्य है और उसकी आलोचना करना महापाप है। ऑक्सबर्ग के अनुसार इस सिद्धान्त का मुख्य आधार है–संसार में समस्त सत्ता, सरकार तथा व्यवस्था ईश्वर ने उत्पन्न की है और स्थापित भी की है।
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