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राष्ट्रीय आय की मर्यादा के तीन मुद्दों की चर्चा कीजिए ।

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राष्ट्रीय आय आर्थिक विकास निर्देशक है । परंतु यह निर्देशक संपूर्ण नहीं है । कुछ मर्यादाएँ देखने को मिलती हैं जो निम्नानुसार है:

(1) राष्ट्रीय आय की गणना में कठिनाई : राष्ट्रीय आय की गणना में अनेक कठिनाइयाँ आती हैं । जैसे – दोहरी गणना, स्व-उपयोग की वस्तुएँ घिसायी जानना कठिन, गैरकानूनी आय, करचोरी, सट्टा पद्धति, निरक्षरता, एक से अधिक व्यवसाय में रुके हुये लोगों के कारण राष्ट्रीय आय और उसकी सही वृद्धिदर का ख्याल नहीं आता इसलिए राष्ट्रीय आय को आर्थिक विकास का उचित मापदंड नहीं कह सकते हैं ।

(2) जनसंख्या की अपेक्षा : राष्ट्रीय आय की गणना के साथ-साथ देश की जनसंख्या को भी ध्यान में लेना चाहिए । क्योंकि राष्ट्रीय आय की वृद्धि के साथ प्रतिव्यक्ति आय भी बढ़नी चाहिए । यदि राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर के साथ जनसंख्या वृद्धि दर भी अधिक हो तो राष्ट्रीय आय में वृद्धि दर होने पर भी आर्थिक विकास का निर्देशक नहीं माना जाता ।

(3) राष्ट्रीय आय की गणना की अलग-अलग पद्धति : अलग-अलग देशों में राष्ट्रीय आय की अलग-अलग पद्धतियों का उपयोग किया जाता है । जैसे – उत्पादन की पद्धति, आय की पद्धति, खर्च की पद्धति प्रमुख हैं । यदि राष्ट्रीय आय की गणना एक पद्धति से करें और उसी की गणना दूसरी पद्धति से करें तो दोनों में अंतर आता है । सभी देशों की राष्ट्रीय आय की गणना अलग-अलग पद्धति से करते हैं परिणाम स्वरुप अन्तर्राष्ट्रीय तुलना का कार्य कठिन होता है ।



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