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राष्ट्रीयता के विकास में दो उत्तरदायी तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।याराष्ट्रवाद के दो कारण लिखिए। याराष्ट्रीयता के किन्हीं दो तत्त्वों का वर्णन कीजिए। 

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राष्ट्रीयता के विकास में दो उत्तरदायी तत्त्व निम्नवत् हैं-

1. भाषायी एकता – भाषा की एकता भी राष्ट्रीयता का एक निर्माणक तत्त्व है और राष्ट्रीयता के निर्माण में जातीय एकता की अपेक्षा भाषा की एकता का महत्त्व अधिक है। इस सम्बन्ध में बर्नार्ड जोजफ ने तो यहाँ तक कहा है, “भाषा राष्ट्रीयता का सबसे शक्तिशाली तत्त्व है।” सामान्य भाषा ऐतिहासिक परम्पराओं को जीवित रखने में सहायक होती है और एक ऐसे राष्ट्रीय मनोविज्ञान को जन्म देती है जिसमें सामान्य नैतिकता का विकास सम्भव होता है, लेकिन सामान्य भाषा के बिना भी राष्ट्रीयता का विकास हो सकता है और एक भाषायी क्षेत्र भी पृथक्-पृथक् राष्ट्र हो सकते हैं। उदाहरणार्थ, स्विट्जरलैण्ड और भारत में एक से अधिक भाषाएँ बोली जाने पर भी ये एक राष्ट्र हैं और अमेरिका तथा कनाडा में एक ही भाषा बोले जाने पर भी ये पृथक्-पृथक् राष्ट्र हैं।

2. जातीय एकता – लम्बे समय तक जातीय एकता राष्ट्रीयता का सबसे मुख्य आधार रहा है। ऐसा माना जाता है कि राष्ट्रीयता एक विशेष प्रकार की आत्मिक चेतना के भाव का नाम है। जिसमें समान जातीयता का तत्त्व शायद सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होता है, किन्तु अब राष्ट्रीयता के निर्माणक तत्त्व के रूप में जातीयता का महत्त्व कम होता जा रहा है और प्रो० हेज के शब्दों |में कहा जा सकता है, “यदि कहीं रक्त की पवित्रता मिल सकती है तो वह केवल असभ्य जातियों में ही सम्भव है।’ स्विट्जरलैण्ड, भारत, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका इस बात के उदाहरण हैं कि जातीय एकता राष्ट्रीयता के निर्माण हेतु आवश्यक नहीं है।



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