1.

रेडियो नाटक लिखने की प्रक्रिया का विश्लेषण कीजिए।​

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कथावस्तु और युग के अनुरूप ही पात्रों की साज सज्जा होती है जिससे अभिनय में जीवन्तता आती है। रेडियो नाटक में आंगिक , सात्विक , आहार्य अभिनय की कोई संभावना नहीं होती , मात्रा वाचिक अभिनय द्वारा ही नाटक का प्रसारण होता है , ये शब्दों द्वारा ही अभिनय पक्ष को उजागर करता है।



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