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रहीमजी सज्जनों के परोपकारी स्वभाव के बारे में क्या कहते हैं?

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रहीमजी कहते हैं कि वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाता। तालाब भी अपना पानी स्वयं नहीं पीता। सज्जनों का स्वभाव भी वृक्ष और तालाब की तरह परोपकारी होता है। वे दूसरों का भला करने के लिए ही संपत्ति का संग्रह करते हैं।



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