1.

साधारण बहुमत से अन्तर्निहित विरोधाभास को स्पष्ट करो।

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साधारण बहुमत से अभिप्राय ऐसी निर्वाचन पद्धति से है जिसमें सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार (प्रत्याशी) को विजयी घोषित किया जाता है। इस प्रणाली में स्पष्ट बहुमत न मिलने पर भी किसी प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जाता है। लोकतन्त्र की भावना के अनुसार किसी प्रत्याशी को आधे से अधिक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। परन्तु कई बार आधे से भी कम वोट लेने वाला प्रत्याशी निर्वाचित हो जाता है। ऐसे प्रतिनिधि को हम वास्तविक प्रतिनिधि नहीं कह सकते। कई बार तो अधिक मत प्राप्त करने पर भी कोई दल विधानपालिका में विरोधी दल का स्थान ग्रहण करता है और अल्पमत का प्रतिनिधित्व करने वाला दल सत्ता में आ जाता है।



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