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साहित्यिक संस्था ‘परिमल’ से फादर बुल्के किस प्रकार जुड़े थे ?

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फादर बुल्के ‘परिमल’ साहित्यिक संस्था से जुड़े थे। वे गोष्ठियों में गंभीर बहस करते थे, साहित्यिक रचनाओं पर अपनी बेबाक राय देते थे, अपना सुझाव देते थे। ‘परिमल’ के सदस्यों के साथ हसी-मजाक में निलिप्त रूप से शामिल होते थे।



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