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Answer» यदि साझेदारी पेढी में साझेदारों के बीच करार न हुआ हो अथवा करारपत्र में उल्लेख न किया हो तो भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के निम्न प्रावधानों का पालन करना पड़ता है । - प्रत्येक साझेदार पेढी में कितनी पूँजी लायेगा । इसके बारे में कोई कानूनी मर्यादा नहीं है । परंतु साझेदार आपसी सहमति से तप करके पूँजी कितना लाना यह तय करते है। हालाकि, प्रत्येक साझेदार को पूँजी निश्चितरूप से लेकर ही आना यह अनिवार्य नहीं है।
- साझेदारों के बीच होनेवाले लाभ-हानि का वितरण समान हिस्से में किया जायेगा ।
- साझेदारों को पूँजी पर ब्याज नहीं दिया जायेगा ।
- साझेदार को पेढी में काम करने के बदले में वेतन, पारिश्रमिक (महेनताना) या कमीशन नहीं दिया जायेगा ।
- साझेदार द्वारा किये गये आहरण पर कोई भी ब्याज नहीं लिया जायेगा ।
- यदि साझेदार ने पेढी को लोन उधार दी हो तो जिस दिन से लोन दी हो तब से 6% की दर से वार्षिक ब्याज दिया जायेगा।
- यदि साझेदार ने पेढी की ओर से योग्य खर्च किया हो तो वह उसे पेढी में से वसूल किया जा सकता है।
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