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Samas Kise Kahate Hain samas ke Bhed likhkar pratyek Shabd ke 10 udaharan samas vigrah ke sath likhiye

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परिभाषासमास का मतलब है संक्षिप्तीकरण। दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया एवं सार्थक शब्द की रचना करते हैं। यह नया शब्द ही समास कहलाता है।यानी कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ को प्रकट किया जा सके वही समास होता है। जैसे:समास के उदाहरण :कमल के सामान चरण : चरणकमलरसोई के लिए घर : रसोईघरघोड़े पर सवार : घुड़सवारदेश का भक्त : देशभक्तराजा का पुत्र : राजपुत्र आदि।सामासिक शब्द या समस्तपद : जो शब्द समास के नियमों से बनता है वह सामासिक शब्द या समस्तपद कहलाता है।पूर्वपद एवं उत्तरपद : सामासिक शब्द के पहले पद को पूर्व पद कहते हैं एवं दुसरे या आखिरी पद को उत्तर पद कहते हैं।समास के भेदसमास के छः भेद होते है :तत्पुरुष समासअव्ययीभाव समासकर्मधारय समासद्विगु समासद्वंद्व समासबहुव्रीहि समास1. तत्पुरुष समास :जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है एवं पूर्वपद गौण होता है वह समास तत्पुरुष समास कहलाता है। जैसे:धर्म का ग्रन्थ : धर्मग्रन्थराजा का कुमार : राजकुमारतुलसीदासकृत : तुलसीदास द्वारा कृततत्पुरुष समास के प्रकार :कर्म तत्पुरुष : ‘को’ के लोप से यह समास बनता है। जैसे: ग्रंथकार : ग्रन्थ को लिखने वालाकरण तत्पुरुष : ‘से’ और ‘के द्वारा’ के लोप से यह समास बनता है। जैसे: वाल्मिकिरचित : वाल्मीकि के द्वारा रचितसम्प्रदान तत्पुरुष : ‘के लिए’ का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: सत्याग्रह : सत्य के लिए आग्रहअपादान तत्पुरुष : ‘से’ का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: पथभ्रष्ट: पथ से भ्रष्टसम्बन्ध तत्पुरुष : ‘का’, ‘के’, ‘की’ आदि का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: राजसभा : राजा की सभाअधिकरण तत्पुरुष : ‘में’ और ‘पर’ का लोप होने से यह समास बनता है। जैसे: जलसमाधि : जल में समाधि(तत्पुरुष समास के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें – तत्पुरुष समास : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण)2. अव्ययीभाव समास :वह समास जिसका पहला पद अव्यय हो एवं उसके संयोग से समस्तपद भी अव्यय बन जाए, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। अव्ययीभाव समास में पूर्वपद प्रधान होता है।अव्यय : जिन शब्दों पर लिंग, कारक, काल आदि शब्दों से भी कोई प्रभाव न हो जो अपरिवर्तित रहें वे शब्द अव्यय कहलाते हैं। अव्ययीभाव समास के पहले पद में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर, आदि आते हैं। जैसे:आजन्म: जन्म से लेकरयथामति : मति के अनुसारप्रतिदिन : दिन-दिनयथाशक्ति : शक्ति के अनुसार आदि।(अव्ययीभाव समास के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें – अव्ययीभाव समास : परिभाषा एवं उदाहरण)3. कर्मधारय समासवह समास जिसका पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता है, अथवा एक पद उपमान एवं दूसरा उपमेय होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।कर्मधारय समास का विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच में ‘है जो’ या ‘के सामान’ आते हैं। जैसे:महादेव : महान है जो देवदुरात्मा : बुरी है जो आत्माकरकमल : कमल के सामान करनरसिंह : सिंह रुपी नरचंद्रमुख : चन्द्र के सामान मुख आदि।(कर्मधारय समास के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें – कर्मधारय समास : परिभाषा एवं उदाहरण)4. द्विगु समास :वह समास जिसका पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण होता है तथा समस्तपद समाहार या समूह का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे:दोपहर : दो पहरों का समाहारशताब्दी : सौ सालों का समूहपंचतंत्र : पांच तंत्रों का समाहारसप्ताह : सात दिनों का समूह(द्विगु समास के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें – द्विगु समास : परिभाषा एवं उदाहरण)5. द्वंद्व समास :जिस समस्त पद में दोनों पद प्रधान हों एवं दोनों पदों को मिलाते समय ‘और’, ‘अथवा’, या ‘एवं ‘ आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है। जैसे:अन्न-जल : अन्न और जलअपना-पराया : अपना और परायाराजा-रंक : राजा और रंकदेश-विदेश : देश और विदेश आदि।(द्वंद्व समास के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें – द्वंद्व समास : परिभाषा एवं उदाहरण)6. बहुव्रीहि समास :जिस समास के समस्तपदों में से कोई भी पद प्रधान नहीं हो एवं दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की और संकेत करते हैं वह समास बहुव्रीहि समास कहलाता है। जैसे:गजानन : गज से आनन वालात्रिलोचन : तीन आँखों वालादशानन : दस हैं आनन जिसकेचतुर्भुज : चार हैं भुजाएं जिसकीमुरलीधर : मुरली धारण करने वाला आदि।.Hope u will my answer .please mark me as brainliest.



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