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शिक्षा के प्रसार ने राष्ट्रीय जनजागरण में क्या भूमिका निभाई?

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भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में अंग्रेजी शिक्षा ने बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया। शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने तथा अंग्रेजों का शासन होने के कारण भारत के प्रत्येक कोने में अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार हुआ। इससे देश में भाषा की एकता स्थापित हो गई तथा इसके परिणामस्वरूप विभिन्न प्रान्तों के प्रबुद्ध लोगों को आपस में (अंग्रेजी भाषा के माध्यम से) विचारविमर्श करने में सहायता मिली। इस प्रकार अनजाने में अंग्रेजी शासन की शिक्षा नीति से भारतीयों को भाषायी बन्धनों से मुक्त होकर एकता की भावना को प्रचारित व प्रसारित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्हें इस कटु सत्य का आभास हुआ कि उनके आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक शोषण का जिम्मेदार ब्रिटिश शासन ही है। इस राष्ट्रीय चेतना के फलस्वरूप ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म हुआ।

अप्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजी शिक्षा के प्रचार ने राष्ट्रीय जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वामी विवेकानन्द, रवीन्द्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, विपिनचन्द्र पाल, चितरंजन दास, लाला लाजपतराय आदि ने पाश्चात्य शिक्षा ग्रहण कर उनकी सभ्यता एवं संस्कृति का ज्ञान अर्जित किया और राष्ट्रीय आन्दोलन में अहम योगदान दिया।



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