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“शमशेर बहादुर सिंह की कविता ‘उषा’ नवीन विम्बों व उपमानों का जीवंत दस्तावेज है।” स्पष्ट कीजिए।

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हिन्दी में प्रयोगवादी कविता का युग आया तो कवियों ने परंपरा से चले आ रहे विम्ब-विधन और उपमानों के स्थान पर नए-नए प्रयोग किए। कवि शमशेर को भी प्रयोगधर्मी’ कवि कहा गया है। पाठ्यपुस्तके में संकलित उनकी कविता ‘उषा’ उनके नए प्रयोगों को प्रस्तुत करती है। ‘उषा’ कविता में कवि ने भोर के दृश्य को चित्रित करने के लिए आकाश को नीला शंख, राख से लीपा गया चौका, लाल केसर से धुली काली सिल, लाल खड़िया से मली गई स्लेट तथा नीले जल में हिलती किसी की गोरी देह बताया है। ये सभी विम्ब और उपमान नए प्रयोग हैं।



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