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शमशेर बहादुर सिंह की ‘उषा’ का प्रकृति वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

Answer»

भोर होने को है। गहरा नीला आकाश एक विशालकाय नीले शंख जैसा लग रहा है। नीले आकाश में भोर का धुंधला प्रकाश ऐसा लगता है जैसे वह राख से लीपा गया चौकी हो, जो अभी गीला है।

अथवा यह आकाश एक विशाल काली सिल है जिसे लाल केसर के जल से धो दिया गया है। या नीले आकाश में उषा की यह लालिमा ऐसी लगती है माने स्लेट पर लाल खड़िया या चाक मल दिया गया हो।

अथवा यह नीले जल में झिलमिलाती किसी रमणी का गोरा शरीर है जो लहरों के जल में हिलता दिखाई दे रहा है।

लो अब सूर्य का उदय हो रहा है। धीरे-धीरे यह मनमोहक भोर का दृश्य अदृश्य होता जा रहा है।



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