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सहशिक्षा पर निबंध लिखिए :

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सहशिक्षा का अर्थ है एक कक्षा में, एक कमरे में छात्रों और छात्राओं की एक साथ पढ़ाई। भारत में सदा इसका विरोध किया जाता था और यह व्यवस्था थी कि बालक और बालिकाओं के गुरुकुल अलग – अलग और एक दूसरे से दूर हों। आजकल सहशिक्षा का विरोध क्रमशः शिथिल होता जा रहा है। सहशिक्षा के समर्थक बहुत प्रकांड विद्वान, उन्नत और प्रगति – शील हैं। वे कहते हैं कि सह – शिक्षा से देश को अनेक लाभ हैं जिनकी उपेक्षा करना आज हानिकारक होगा।

सह – शिक्षा से राष्ट्र के धन का अव्यय नहीं होगा। एक साथ लड़कों व लड़कियों के पढ़ने से अध्यापक वर्ग, भवन, फर्नीचर, पुस्तकालय तथा व्यवस्था आदि पर दोहरा व्यय नहीं करना होगा। आज जब कि योग्य शिक्षित अध्यपकों का अभाव है, और यह भी अत्यंत आवश्यक है कि दोनों एक योग्य अध्यापक से पढ़ लिया करें। इस तरह विद्यालयों की ईमारतें भी अलग – अलग नहीं बनानी पड़ेंगी।

लड़कों व लड़कियों के एक साथ पढ़ने और अधिक परिचय से उनमें एक दूसरे के प्रति मिथ्या आकर्षण कम हो जाएगा। अपरिचित व अज्ञात रहस्य के प्रति आकर्षण अधिक होता है। एक दूसरे के साथ अधिक समय व्यतीत करने से नवीनता, कोतूहलता और रहस्यमयता कम हो जाएगी, वातावरण सहज नैतिक हो जाएगा।

दोनों के एक साथ रहने से लड़कों की उच्छंखलता कम हो जाएगी। वे लडकियों से शालीनता, नम्रता आदि गुण सीखेंगे। लड़कियाँ लड़कों से पौरुष व साहस आदि गुण सीखेंगी।

आज नारी भी राष्ट्र की समान नागरिक है। नागरिकता के सब गुणों का विकास सह – शिक्षा से ही नारी में हो सकेगा।

शिक्षा का संबंध मानव जीवन से है। यदि शिक्षा जीवन के उपयोग में नहीं आई तो वह व्यर्थ है। शिक्षण काल में विद्यार्थी या विद्यार्थिनी को इन गुणों का विकास करना चाहिए जो उसके भावी जीवन में उपयोगी हों। यदि स्त्री और पुरुषों का कार्यक्षेत्र एक है, उन दोनों को एक समान सार्वजनिक कार्य करने हैं, एक समान सरकारी या व्यापारिक दफ्तरों में नौकरी करनी है, एक समान धन उपार्जन करना है तब सहशिक्षा का विरोध नहीं किया जा सकता। अगर नर और नारी को अलग – अलग क्षेत्रों में काम करना है दोनों के लिए भिन्न गुणों की आवश्यकता है।

सहशिक्षा अपने में ही सुंदर प्रणाली है। इसका वातावरण बुरा या अच्छा हमारे छात्र – छात्रायें ही बनाते हैं। यदि हमारे छात्र – छात्राओं में परस्पर सद्भावना होगी तो निश्चय ही सहशिक्षा सफलता की चरम सीमा को प्राप्त कर सकती है। यह तो विद्यार्थियों का विषय है। अच्छा वातावरण उन्हीं के लिए लाभदायक है। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य की मानसिक और नैतिक शक्तियों का विकास है। सहशिक्षा इसकी कसौटी है। छात्र और छात्राओं की विजय इसी में है कि वे इस कसौटी पर खरे उतरें।



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