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श्वास क्रिया की दर से क्या अभिप्राय है?

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श्वसन-क्रिया सामान्यतः एक अनैच्छिक क्रिया है। एक सामान्य रूप से स्वस्थ व्यक्ति में यह क्रिया 15-18 बार प्रति मिनट की दर से होती है। शिशु अवस्था में इसकी दर काफी अधिक (25-40 बार प्रति मिनट तक) होती है। यदि समय का आकलन किया जाए तो प्रत्येक वयस्क व्यक्ति प्रति 4 सेकण्ड में यह क्रिया एक बार करता है। इसमें 1.5 सेकण्ड प्र:श्वसन के लिए तथा 2.5 सेकण्ड नि:श्वसन के लिए होता है। श्वसन क्रिया की इस दर को आवश्यकतानुसार नियमित तथा संचालित करने का दायित्व मस्तिष्क में स्थित एक जोड़े श्वास केन्द्र का होता है। ये केन्द्र श्वसन-क्रिया से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की पेशियों, पसलियों तथा तन्तुपट आदि के संकुचन एवं शिथिलन पर नियन्त्रण बनाए रखते हैं।

दौड़ने, भागने, व्यायाम करने, खेलने-कूदने अथवा अन्य शारीरिक कार्य करने पर श्वास-दर बढ़ जाती है। ज्वर आदि की स्थिति में भी श्वास-दर में वृद्धि हो जाती है। इसका कारण है-उपर्युक्त दशाओं में अधिक ऊर्जा की खपत होने के कारण अधिक एवं अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता। श्वसन-क्रिया पूर्णरूप से अनैच्छिक क्रिया है, परन्तु उसे व्यायाम, योगाभ्यास आदि के द्वारा आंशिक रूप से ऐच्छिक बनाया जा सकता है।



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