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सिकरम का टिकट रद्द होने का रहस्य क्या था?

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गांधीजी के पास सिकरम का टिकट था। इसके अलावा अब्दुल्ला सेठ ने सिकरमवाले के नाम तार भी कर दिया था। सिकरम में सिकरम कंपनी का गोरा मुखिया भी था। उसने गांधीजी से कहा कि उनका टिकट तो रह हो गया है। गांधीजी ने उसे बताया कि उनका टिकट सही है, पर गोरे मुखिया के मन में तो कुछ और ही था। उसकी दृष्टि में तो गांधीजी ‘कुली’ थे। वह नहीं चाहता था कि वे गोरे यात्रियों के साथ बैठें। इसलिए उसने जानबूझकर गांधीजी के टिकट को रद्द हो गया बताया। इस प्रकार गांधीजी का सिकरम का टिकट रद्द होने का रहस्य गोरों के बीच एक भारतीय के बैठने की असहनशीलता थी।



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