1.

समाजवाद के अनुसार राज्य का कार्यक्षेत्र बताइए।यासमाजवादी राज्य के कार्यों का परीक्षण कीजिए। 

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राज्य के कार्यक्षेत्र का निर्धारण करने की दृष्टि से समाजवादी सिद्धान्त व्यक्तिवादी सिद्धान्त के ठीक विपरीत है। व्यक्तिवाद जहाँ राज्य के सीमित कार्यक्षेत्र पर बल देता है वहीं समाजवाद राज्य के उन समस्त कार्यों को सम्पादित करने को कहता है, जिनसे समाज की उन्नति सम्भव है। इसके अतिरिक्त समाजवाद की मान्यता है कि राज्य को उत्पत्ति एवं वितरण के साधनों पर नियन्त्रण रखकर स्वयं ही सार्वजनिक हित के कार्यों का सम्पादन करना चाहिए। अतः कहा जा सकता है कि समाजवाद के अनुसार प्रायः सामाजिक जीवन के समस्त कार्य राज्य के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत आ जाते हैं। इस सम्बन्ध में गार्नर का यह कथन उचित ही है, “राज्य मानव विकास की सर्वोच्च संस्था है। उसका कार्यक्षेत्र व्यापक है। वह व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक एवं नैतिक सभी क्षेत्रों के हितों की अभिवृद्धि करती है।”



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