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समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक विद्युत-रासायनिक सेल बनना माना जाता है?

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लोहे की सतह पर उपस्थित जल की परत वायु के अम्लीय ऑक्साइडों; जैसे- CO2, SO2 आदि को घोलकर अम्ल बना लेती है जो वियोजित होकर H+ आयन देते हैं 

H2O+ CO2 → H2CO3 ⇌ 2H+ +CO32- 

H+ आयनों की उपस्थिति में, लोहा कुछ स्थलों पर से इलेक्ट्रॉन खोना प्रारम्भ कर देता है तथा फेरस आयन बना लेता है। अतः ये स्थल ऐनोड का कार्य करते हैं – 

Fe(s) → Fe2+ (aq) + 2e– 

इस प्रकार धातु से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन अन्य स्थलों पर पहुँच जाते हैं जहाँ H+ आयन तथा घुली हुई ऑक्सीजन इन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर लेती है तथा अपचयन अभिक्रिया हो जाती है। अतः ये स्थल कैथोड की भाँति कार्य करते हैं – 

O2(g) +4H+ (aq) +4e– → 2H2O(l) 

सम्पूर्ण अभिक्रिया इस प्रकारे दी जाती है 

2Fe(s)+O2(g) + 4H+ (aq) → 2Fe2+ (aq) + 2H2O(l)

इस प्रकार लोहे की सतह पर विद्युत-रासायनिक सेल बन जाता है। फेरस आयन पुनः वायुमण्डलीय ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होकर फेरिक आयनों में परिवर्तित हो जाते हैं। जो जल अणुओं से संयुक्त होकर जलीय फेरिक ऑक्साइड Fe2O3. xH2O बनाते हैं। यह जंग कहलाता है।



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