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सन् 57 के सितम्बर मास में अर्द्ध रात्रि के समय चाँदनी में एक बालिका स्वच्छ उज्ज्वल वस्त्र पहने हुए नानासाहब के भग्नावशिष्ट प्रासाद के ढेर पर बैठी रो रही थी । पास ही जनरल अउटरम की सेना भी ठहरी थी । कुछ सैनिक रात्रि के समय रोने की आवाज़ सुनकर यहाँ गये । बालिका केवल रो रही थी । सैनिकों के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं देती थी । इसके बाद कराल रूपधारी जनरल अउटरम भी वहाँ पहुँच गया । वह उसे तुरन्त पहिचानकर बोला – ‘ओह ! यह नाना की लड़की मैना है !’1. देर पर बैठी बालिका क्यों रो रही थी ?2. बालिका सैनिकों के प्रश्नों का उत्तर क्यों नहीं दे पा रही थी?3. ‘रात्रि’ तथा चाँदनी शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए । |
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Answer» 1. ढेर पर बैठी बालिका के पिता नाना के महल को अंग्रेजों ने तोप के गोलों से नष्ट कर दिया था । बालिका को यह महल बहुत प्रिय था । सेनापति ‘हे’ के समक्ष वह इस महल को बचाने का अनुरोध भी कर चुकी थी । महल के भग्न होने के दुख में बालिका रो रही थी। 2. बालिका मैना अपने प्रिय महल के विध्वंस होने के कारण बहुत दुःखी थी । दुःख की अधिकता के कारण यह बहुत जोरों से रो रही थी । जिसके कारण वह सैनिकों के प्रश्नों को सुन पाने में असमर्थ थी । इस कारण बालिका सैनिकों के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पा रही थी । 3. रात्रि तथा चाँदनी शब्द के पर्यायवाची निम्नलिखित हैं |
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